वंचना' के जरिए अकेलेपन और मानवीय संवेदनाओं को कैनवास पर उतार रहीं आशिमा मेहरोत्रा

नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कला प्रदर्शनी "वंचना" दर्शकों को आधुनिक समाज की भावनात्मक चुनौतियों और मानवीय संवेदनाओं से रूबरू करा रही है। रेलवे बोर्ड हेरिटेज की कार्यकारी निदेशक और कलाकार आशिमा मेहरोत्रा ने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से जीवन के विविध अनुभवों, संघर्षों और अकेलेपन को अभिव्यक्त किया है।
Broadcast Mantra से विशेष बातचीत में आशिमा मेहरोत्रा ने कहा कि आज का मनुष्य पहले की तुलना में अधिक अकेलापन महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति भी भावनात्मक स्तर पर स्वयं को असहाय और अकेला महसूस कर सकता है। उनकी प्रदर्शनी "वंचना" इसी मानवीय स्थिति को चित्रों के माध्यम से सामने लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा, "यदि आपको लगता है कि कोई बेसहारा है, तो उसका सहारा बनने का प्रयास कीजिए। समाज में आपसी जुड़ाव और संवेदनशीलता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।"
रंगों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि रंग केवल दृश्य माध्यम नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा के वाहक भी हैं। जिस प्रकार ईश्वर का कोई निश्चित स्वरूप नहीं होता, उसी प्रकार ऊर्जा भी विभिन्न रूपों में हमारे जीवन को प्रभावित करती है और रंग उसका महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
देश में विकसित भारत के लक्ष्य और शिक्षित भारत की आवश्यकता पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आशिमा मेहरोत्रा ने कहा कि शिक्षा को केवल स्कूलों और कॉलेजों तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार शिक्षा हमारे संस्कारों, जीवन मूल्यों और व्यवहार का हिस्सा है। सही शिक्षा व्यक्ति को सक्षम बनाती है और एक संवेदनशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
"वंचना" प्रदर्शनी कला प्रेमियों को केवल चित्रों का अनुभव नहीं कराती, बल्कि उन्हें अपने भीतर झांकने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश भी देती है।










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