योग केवल आसन और प्राणायाम नहीं है।योग स्वयं से जुड़ने का माध्यम है

15 June, 2026, 9:23 pm

नई दिल्ली, 15 जून, सोमवार।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि विभाग द्वारा आयोजित “पावरिंग हेल्थ” पुस्तक के लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम में स्वास्थ्य, योग और भारतीय जीवन-पद्धति के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श हुआ। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक के अंग्रेजी और हिन्दी, दोनों संस्करणों का लोकार्पण हुआ। परिचर्चा की अध्यक्षता की आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्म भूषण रामबहादुर राय ने, जबकि मुख्य अतिथि थीं पूर्व न्यूज एंकर एवं बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुश्री शाजिया इल्मी। इस अवसर पर लेखक सुनील कुमार सिन्हा ने पुस्तक “पावरिंग हेल्थ” के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पुस्तक में डाइट कैप्सूल, योग कैप्सूल, शरीर एवं मन के डिटॉक्सिफिकेशन तथा सर्कैडियन रिद्म (जैविक दिनचर्या चक्र) जैसे विषयों को भारतीय दृष्टि और आधुनिक जीवन-शैली के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
इस परिचर्चा में इंडिया फ़ाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष कैप्टन आलोक बंसल, आईजीएनसीए के डीन एवं कलानिधि विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) रमेश सी. गौड़, पुस्तक के लेखक सुनील कुमार सिन्हा, स्तंभकार, लेखक एवं योग विशेषज्ञ कौशल किशोर, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं विश्व योगासन चैम्पियन तेजस्वी कुमार शर्मा तथा अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ एवं माइंडफुलनेस कोच डॉ. शिवादित्य पुरोहित भी शामिल थे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में राम बहादुर राय ने कहा कि इस पुस्तक को केवल योग के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। यह स्वास्थ्य तथा संतुलित आहार और योगाभ्यास के माध्यम से संतुलित जीवन विकसित करने के उपायों पर आधारित पुस्तक है। योग की विविध धाराओं और परम्पराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने पावरिंग हेल्थ को एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका बताया, जो दैनिक जीवन में स्वास्थ्य-सम्बंधी सार्थक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक अच्छे स्वास्थ्य के महत्त्व पर बात करती है तथा शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन में आहार की भूमिका को रेखांकित करती है। 
विशिष्ट अतिथि शाज़िया इल्मी ने कहा कि यह पुस्तक उन सिद्धांतों को समाहित करती है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांशतः जीवन मन को जीतने का नाम है, क्योंकि मन ही अनेक चुनौतियों और संघर्षों का कारण बन जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निरंतर संघर्ष चलते रहते हैं, और इसी संदर्भ में यह पुस्तक योग की दिशा मं  प्रेरित करने वाले एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में उभरती है। भारत की दीर्घकालिक परम्पराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सदियों से स्वास्थ्य और योग के प्राचीन विज्ञान का धनी रहा है। योग को स्वयं से जुड़ने का माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति को अपने भीतर लौटने और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
कैप्टन आलोक बंसल ने भारतीय ज्ञान-परम्परा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल दिया। प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़ ने सभी वक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह पुस्तक सबको पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि आईजीएनसीए भारतीय परम्पराओं और ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण एवं प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। तेजस्वी कुमार शर्मा ने कहा कि यह एक भ्रांति है कि योग केवल आसन और प्राणायाम है। वास्तव में योग मनुष्य के संपूर्ण कल्याण का विज्ञान है। इस अवसर पर कौशल किशोर तथा डॉ. शिवादित्य पुरोहित ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन बताया।
इस कार्यक्रम में विद्वानों, योग साधकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा आम जनों ने भाग लिया और समकालीन समाज में स्वास्थ्य एवं कल्याण के समग्र दृष्टिकोणों के महत्त्व पर संवाद किया। नई दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के समवेत सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के संवर्धन में योग तथा उससे संबद्ध विधाओं की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

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