मुंबई में इंडिया लॉजिस्टिक्स कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन

20 June, 2026, 10:22 pm

मुंबई, 20 जून। 1939 में स्थापित बृहन्मुंबई कस्टम ब्रोकर्स एसोसिएशन (BCBA) ने मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल में इंडिया लॉजिस्टिक्स कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे संस्करण का सफल आयोजन किया। "वन फ्रेटरनिटी, वन विजन – लॉजिस्टिक्स ड्राइविंग इंडिया टुवर्ड्स विकसित भारत" विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में कस्टम, पोर्ट, शिपिंग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े 550 से अधिक प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत सीबीआईसी (CBIC) पवेलियन के उद्घाटन से हुई। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने ऑनलाइन संबोधन में आधुनिक, भरोसेमंद और तकनीक आधारित कस्टम प्रशासन की परिकल्पना साझा की।

उद्घाटन सत्र में सीबीआईसी के सदस्य (कस्टम्स) योगेंद्र गर्ग, संयुक्त सचिव (कस्टम्स) अनुपम प्रकाश, अतिरिक्त महानिदेशक शिपिंग सुशील मान सिंह खोपड़े, महानिदेशक मूल्यांकन सुनील जैन, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सीईओ कैप्टन बीवीजेके शर्मा, एमएससी इंडिया एवं सीएसएलए के चेयरमैन कैप्टन दीपक तिवारी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष ओम हिसारिया तथा संसारा ग्रुप के ग्रुप प्रेसिडेंट एवं सीईओ मुकेश ओझा सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप पर चर्चा

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण चार विषयगत सत्र रहे, जिनमें भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

पहले सत्र "इंडिया 2030, 2035, 2047 – ए रोडमैप फॉर विकसित भारत" में आर्थिक विकास, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा हुई। इसमें योगेंद्र गर्ग, अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ शैलेश हरिभक्ति, कैप्टन दीपक तिवारी, डॉ. प्रसाद प्रधान और राहुल आहलूवालिया ने अपने विचार रखे।

दूसरे सत्र "बिल्डिंग इंडिया'ज़ डिजिटल स्पाइन – कस्टम्स एंड ट्रेड" में डिजिटलाइजेशन और व्यापार सुगमता पर फोकस किया गया। वक्ताओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा इंटीग्रेशन और आधुनिक कस्टम प्रक्रियाओं को भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

तीसरे सत्र "जियोपॉलिटिक्स एंड द न्यू ज्योमेट्री ऑफ ट्रेड" में वैश्विक राजनीतिक परिवर्तनों का व्यापार और सप्लाई चेन पर प्रभाव विषय रहा। विशेषज्ञों ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की।

चौथे सत्र "पॉलिसी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर – बिल्डिंग इंडिया'ज़ फ्यूचरिस्टिक लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम" में बंदरगाह, भूमि बंदरगाह, रेल और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

कस्टम ब्रोकर्स को विकास का साझेदार बताया

बीसीबीए के अध्यक्ष संजीव हराले ने कहा कि कस्टम ब्रोकर्स और फ्रेट फॉरवर्डर्स केवल व्यापार को सुगम बनाने वाले नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के वास्तविक साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग जगत की शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

बीसीबीए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष परेश ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ऐसा मंच बन चुका है जहां कस्टम ब्रोकर्स की आवाज़ को राष्ट्रीय नीति निर्माण में सम्मानपूर्वक सुना जाता है।

पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत मुलानी ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार और व्यापार जगत के बीच साझेदारी को और मजबूत करना होगा। ऐसे मंच व्यापार सुगमता और नीति सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्र निर्माण में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भूमिका

समापन सत्र "लॉजिस्टिशियंस – बिल्डिंग ए बेटर इंडिया" में वक्ताओं ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में कुशल और आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

बीसीबीए ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रायोजकों, भागीदारों, वक्ताओं और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए इसी तरह की पहल जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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