दृष्टिबाधित छात्रों को भूजल संरक्षण का संदेश, सीजीडब्ल्यूबी ने चंडीगढ़ में आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम

25 July, 2026, 4:51 pm

 

चंडीगढ़, 25 जुलाई।केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, चंडीगढ़ ने सेक्टर-26 स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड (IFTB) में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए "भूजल के प्रति जागरूकता" विषय पर एक विशेष जनसंवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य भूजल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को भूजल के महत्व से परिचित कराना था।

जल बचाने, वर्षा जल संचयन और जल के जिम्मेदार उपयोग का संकल्प

कार्यक्रम की शुरुआत 'जल संरक्षण संकल्प' के साथ हुई, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और केंद्रीय भूजल बोर्ड के अधिकारियों ने जल बचाने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और दैनिक जीवन में जल के जिम्मेदार उपयोग का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय भूजल बोर्ड, चंडीगढ़ के हेड ऑफ ऑफिस विद्या नंद नेगी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भूजल संरक्षण में जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद डॉ. प्रबीर कुमार नाइक, निदेशक (पीआईबी) एवं केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के अतिरिक्त प्रभार ने युवाओं में भूजल के सतत उपयोग और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष दिनेश कुमार कपिला  ने केंद्रीय भूजल बोर्ड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों में पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।

"हमारे पैरों के नीचे छिपा जल –भूजल""Groundwater – The Hidden Water Beneath Our Feet"

कार्यक्रम के दौरान "हमारे पैरों के नीचे छिपा जल –भूजल" विषय पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें मिट्टी, रेत और बजरी जैसे भू-वैज्ञानिक नमूनों के माध्यम से भूजल की उपलब्धता, एक्वीफर, भूजल पुनर्भरण और सतत भूजल प्रबंधन की जानकारी दी गई। दृष्टिबाधित छात्रों ने इन नमूनों को स्पर्श कर भूगर्भीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझा।

छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भूजल संरक्षण पर वाद-विवाद प्रतियोगिता और वैज्ञानिक क्विज़ का भी आयोजन किया गया। क्विज़ में भूजल पुनर्भरण, एक्वीफर, सिंचाई पद्धतियों, जल-कुशल फसलों और सतत भूजल प्रबंधन से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जिनका छात्रों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और छात्रों तथा केंद्रीय भूजल बोर्ड के अधिकारियों के बीच अनौपचारिक संवाद के साथ हुआ। इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि भूजल भले ही धरती के नीचे छिपा हुआ हो, लेकिन यह देश की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदाओं में से एक है, जिसके संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और जनजागरूकता बेहद आवश्यक है।

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