एआई और डेटा महत्वपूर्ण, लेकिन इंसानी समझ का कोई विकल्प नहीं: रितेश गौबा

चंडीगढ़, 4 अगस्त। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI ) और डेटा एनालिटिक्स के दौर में भी किसी उत्पाद या सेवा की सफलता के लिए इंसानी समझ और अनुभव सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह बात एपिगामिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रितेश गौबा ने इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (आईडीसी), चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम ‘ग्लोबल मैनेजमेंट इन द एज ऑफ एआई: फ्यूचर पाथवेज’ के दौरान कही।
आईडीसी के सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ इन सोशल साइंसेज़ एंड मैनेजमेंट (CASSM) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एमबीए और एमए (अर्थशास्त्र) के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गौबा ने कहा कि आज एआई और डेटा के जरिए उपभोक्ताओं के व्यवहार का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और सही रणनीति बनाने में इंसानी सोच और अनुभव की भूमिका सबसे अहम रहती है।
उन्होंने कहा कि भारत में केवल युवा ही नहीं, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोग स्वास्थ्य के प्रति पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो रहे हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी ने लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि आज एआई किसी व्यक्ति के शरीर से जुड़े आंकड़ों के आधार पर फिटनेस और डाइट प्लान तैयार कर सकता है, लेकिन सही निर्णय लेने के लिए इंसानी विवेक आवश्यक है।
रितेश गौबा ने विद्यार्थियों को हमेशा जिज्ञासु बने रहने और स्वयं को लगातार चुनौती देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, निरंतर सीखने की इच्छा और नई सीमाओं को पार करने का साहस जरूरी है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पंजाब सरकार के इन्वेस्ट पंजाब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित ढाका (आईएएस) ने कहा कि सरकारी और कॉरपोरेट क्षेत्र की कार्यशैली भले अलग हो, लेकिन सफलता के मूल सिद्धांत समान हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल और कॉलेज से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और कौशल के बल पर सफलता हासिल की। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और कौशल ही सबसे बड़ी पूंजी हैं तथा किसी भी क्षेत्र में हर दिन स्वयं को साबित करना पड़ता है।
अमित ढाका ने कहा कि केवल डिग्री सफलता की गारंटी नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसे कौशल विकसित करने चाहिए जो उन्हें दूसरों से अलग पहचान दिलाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए और व्यक्ति को अपने शिक्षकों, साथियों तथा जूनियरों से भी सीखने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
सरकारी विभागों में तकनीक और एआई के बढ़ते उपयोग पर उन्होंने कहा कि वे अपनी तकनीकी टीम पर पूरा भरोसा करते हैं, लेकिन आम नागरिकों के हित में नीतियां बनाने के लिए जमीनी हकीकत को समझना भी उतना ही जरूरी है।
आईडीसी के चेयरपर्सन डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि एआई के कारण दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन यह मानवीय बुद्धिमत्ता, तर्क और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि संस्थान आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा ताकि विद्यार्थियों को उद्योग और प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता रहे।
कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया स्थित यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल सिडनी (यूबीएसएस) के चांसलर डॉ. गैरी मल्होत्रा ने आईडीसी और यूबीएसएस के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विशेष शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी। यूबीएसएस के प्रो. एलन बोवेन-जेम्स और डॉ. मृगाक्षी ने ऑस्ट्रेलिया से ऑनलाइन जुड़कर विद्यार्थियों को संबोधित किया।


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