65 साल पहले बनी था बर्लिन वॉल, आज भी जर्मनी के दिलों में जिंदा है विभाजन का दर्द

14 August, 2026, 9:35 am

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में गुरुवार को बर्लिन वॉल के निर्माण की 65वीं बरसी मनाई गई। 13 अगस्त 1961 को पूर्वी जर्मनी के नेतृत्व ने पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन के बीच दीवार खड़ी कर दी थी। इस दीवार ने परिवारों को अलग कर दिया, दोस्तों को एक-दूसरे से दूर कर दिया और लाखों लोगों को पूर्वी जर्मनी की तानाशाही व्यवस्था के भीतर कैद कर दिया।

बरसी के मौके पर बर्लिन वॉल मेमोरियल में आयोजित स्मरण समारोह में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। जर्मन संसद की अध्यक्ष जूलिया क्लॉकनर और बर्लिन के गवर्निंग मेयर काई वेगनर ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीवार के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।

‘दीवार आज भी लोगों के मन में मौजूद’

जूलिया क्लॉकनर ने कहा कि बर्लिन की पुरानी सीमा आज लगभग अदृश्य हो चुकी है, लेकिन दीवार ने जर्मनी पर जो निशान छोड़े हैं, वे अब भी लोगों की सोच और पहचान को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी की अलग-अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज भी राजनीतिक मुद्दों पर लोगों की राय में दिखाई देती है।

उन्होंने जर्मनों से एक-दूसरे की बात सुनने और आपसी एकजुटता बढ़ाने की अपील की। उनके मुताबिक, 1989 में दीवार गिराने के लिए जिस साहस की जरूरत पड़ी थी, आज भी उसी तरह के साहस की जरूरत है।

मर्ज ने लोकतंत्र और आजादी की रक्षा का दिया संदेश

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि 65 साल पहले पूर्वी जर्मनी के नेतृत्व ने बर्लिन वॉल का निर्माण कराया था। आज जर्मनी उस समय की तुलना में अधिक समय से एकजुट है और देश स्वतंत्रता एवं शांति में रह रहा है।

उन्होंने कहा कि बर्लिन वॉल का सबसे बड़ा सबक यही है कि आजादी और लोकतंत्र अपने आप हासिल रहने वाली चीजें नहीं हैं, बल्कि उनकी हमेशा रक्षा करनी पड़ती है।

‘इतिहास को भुलाने की कोशिश खतरनाक’

बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने 13 अगस्त 1961 को शहर के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दीवार ने परिवारों को तोड़ा, दोस्तों को अलग किया और लोगों की जिंदगी की योजनाओं को तबाह कर दिया।

जर्मनी के संस्कृति राज्य मंत्री वोल्फ्राम वाइमर ने भी पूर्वी जर्मनी की तानाशाही के इतिहास को कम करके दिखाने के प्रयासों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अतिवादी, चाहे वे वामपंथी हों या दक्षिणपंथी, पूर्वी जर्मनी के अतीत की कठोर वास्तविकताओं को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘ऐतिहासिक विस्मृति’ का खतरा बताया।

स्कूलों में पढ़ाया जाए पूर्वी जर्मनी का इतिहास

बर्लिन वॉल फाउंडेशन के निदेशक एक्सेल क्लाउस्मायर ने कहा कि स्कूलों में पूर्वी जर्मनी और जर्मनी के विभाजन का इतिहास अधिक विस्तार से पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पाठ्यक्रम में यह इतिहास अक्सर बहुत कम पढ़ाया जाता है और कई बार स्कूली शिक्षा के अंतिम वर्षों तक इसकी बारी नहीं आती।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना जरूरी है कि पूर्वी जर्मनी में बिना स्वतंत्र चुनावों के एक निरंकुश शासन था और लोकतंत्र को कभी भी स्वाभाविक या स्थायी मानकर नहीं चलना चाहिए।

28 साल से ज्यादा समय तक खड़ी रही दीवार

बर्लिन वॉल का निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरू हुआ था। पूर्वी जर्मनी की सरकार का उद्देश्य पश्चिमी बर्लिन और पश्चिमी जर्मनी की ओर हो रहे बड़े पैमाने पर पलायन को रोकना था।

बर्लिन वॉल फाउंडेशन के अनुसार, दीवार या पूर्वी जर्मन सीमा व्यवस्था से जुड़े मामलों में कम से कम 140 लोगों की मौत हुई। लगभग 155 किलोमीटर लंबी इस सीमा ने बर्लिन को 28 साल से ज्यादा समय तक विभाजित रखा।

9 नवंबर 1989 को पूर्वी जर्मनी में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के बीच बर्लिन वॉल खोल दी गई। इसके लगभग एक साल बाद 3 अक्टूबर 1990 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का औपचारिक पुनर्एकीकरण हुआ।

बर्लिन वॉल आज भले ही इतिहास का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन उसकी स्मृति जर्मनी के लिए आज भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है—आजादी, लोकतंत्र और एकता की रक्षा लगातार करनी पड़ती है।

इनपुट-डीपीए

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