भारत के हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु डिजाइन-आधारित नवाचार का प्रदर्शन

10 अगस्त 2026 ।(इनपुट: पीआईबी)
नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में सोमवार को राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइनर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की ओर से आयोजित सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, फैशन डिजाइनरों, वस्त्र विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, क्लस्टर डिजाइनरों, मास्टर बुनकरों, निर्यातकों, खुदरा विक्रेताओं और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में डिजाइन-आधारित नवाचार, बाजारोन्मुख उत्पाद विकास और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप भारतीय हथकरघा क्षेत्र को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
35 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है हथकरघा क्षेत्र
वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र का भविष्य देश के बुनकरों के पारंपरिक कौशल के साथ-साथ मजबूत संस्थागत समर्थन पर भी निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। मंत्रालय के सहयोगी तंत्र के तहत 29 बुनकर सेवा केंद्र और 357 हथकरघा क्लस्टर विकास कार्यक्रम उत्पादन क्षमता, कौशल और बाजार संपर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
80 क्लस्टरों को डिजाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया
नीलम शमी राव ने बताया कि इस वर्ष डिजाइन की दृष्टि से संभावनाशील 80 हथकरघा क्लस्टरों को एक संरचित डिजाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसके लिए करीब 80 डिजाइनरों को प्रत्यक्ष रूप से लगाया गया है। इसका उद्देश्य डिजाइन नवाचार को प्रीमियम मूल्य निर्धारण और बुनकरों की बढ़ी हुई आय में बदलना है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय आने वाले वर्षों में इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिजाइन को मूल्य संवर्धन का प्रमुख माध्यम बताया
विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने सम्मेलन में भारतीय हथकरघा उत्पादों के मूल्य, प्रतिस्पर्धात्मकता और सततता बढ़ाने में डिजाइन की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती बाजार मांगों के अनुरूप पारंपरिक शिल्प को विकसित करने के लिए डिजाइनरों और बुनकरों के बीच बेहतर सहयोग जरूरी है। मंत्रालय की ओर से इस तरह के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नौ क्लस्टरों के अभिनव उत्पादों की प्रदर्शनी
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 के तहत चयनित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें आठ राज्यों के नौ हथकरघा क्लस्टरों में किए गए डिजाइन हस्तक्षेप और समकालीन उत्पाद विकास को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में मिरनचक क्लस्टर, पूर्व बर्धमान क्लस्टर, वनिता क्लस्टर, देव भूमि भराड़ी क्लस्टर, द्वारका क्लस्टर, खुरकुल क्लस्टर, रिडरोल क्लस्टर, इंफाल पूर्व और कोंडापालकला क्लस्टर के उत्पाद शामिल रहे।
पारंपरिक शिल्प और आधुनिक बाजार का मेल
प्रदर्शनी में दिखाए गए उत्पादों ने यह दर्शाया कि डिजाइन के जरिए पारंपरिक बुनाई तकनीकों और आधुनिक उपभोक्ता जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। संरचित डिजाइन हस्तक्षेपों के जरिए तैयार किए गए उत्पादों में समकालीन सौंदर्यबोध के साथ भारतीय हथकरघा की पारंपरिक पहचान को बनाए रखने पर जोर दिया गया। इससे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों के विकास और बुनकरों के लिए बेहतर बाजार अवसर पैदा होने की संभावनाएं सामने आईं।
राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 का पुरस्कार समारोह रहा। इसमें परिधान, गृह साज-सज्जा, शिल्प पुनरुद्धार और निर्णायक मंडल की विशेष सम्मान श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्लस्टर डिजाइनरों को सम्मानित किया गया। पुरस्कारों के जरिए ऐसे डिजाइन हस्तक्षेपों को पहचान दी गई, जिन्होंने पारंपरिक शिल्पकला को समकालीन सौंदर्यबोध और बदलती बाजार प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा।
बाजार प्रतिस्पर्धा और डिजाइन नवाचार पर चर्चा
सम्मेलन में तीन विषयगत पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इनमें ‘डिजाइन नवाचार एवं बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता’, ‘सतत क्लस्टर विकास एवं भारतीय हथकरघा का भविष्य’ तथा ‘भारतीय हथकरघा में मूल्य सृजन के लिए डिजाइन थिंकिंग’ विषय शामिल रहे। प्रमुख डिजाइनरों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने इन विषयों पर विचार साझा किए।
ब्रांडिंग और निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर जोर
पैनल चर्चाओं के दौरान बदलते उपभोक्ता रुझानों, सततता, ब्रांडिंग, निर्यात और प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए नए डिजाइन, बेहतर उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों के अनुरूप रणनीति तैयार करने की आवश्यकता बताई।
डिजाइनर-बुनकर सहयोग की संभावनाएं सामने आईं
सम्मेलन में लगी प्रदर्शनी को प्रतिभागियों से उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली। चयनित क्लस्टरों में डिजाइनरों और बुनकरों के सहयोग से विकसित उत्पादों ने यह दिखाया कि डिजाइन हस्तक्षेप के जरिए पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को नए बाजारों के लिए तैयार किया जा सकता है। साथ ही, इससे भारत की विविध बुनाई विरासत को संरक्षित करते हुए बुनकरों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करने की संभावनाएं भी सामने आईं।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में पहल
राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइनर सम्मेलन 2026 ने हथकरघा क्षेत्र में डिजाइन को नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार के प्रमुख माध्यम के रूप में स्थापित करने की वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श से डिजाइनर-बुनकर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, सतत आजीविका के अवसर बढ़ाने और भारतीय हथकरघा उत्पादों की घरेलू तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।


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