अर्जुन राम मेघवाल ने लॉन्च किया पुनर्गठित ‘इंडिया कोड पोर्टल’, कानूनों तक पहुंच होगी आसान

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने नई दिल्ली में पुनर्गठित ‘इंडिया कोड पोर्टल’ का शुभारंभ किया। सरकार ने कानूनों तक नागरिकों की पहुंच को अधिक सरल, तेज, व्यापक और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से पोर्टल को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से नया रूप दिया है। इसमें एआई-सहायता प्राप्त सर्च, सेमांटिक एवं स्पीच सर्च, बेहतर नेविगेशन और बहुभाषी एक्सेस जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
कर्तव्य भवन में हुआ पोर्टल का शुभारंभ
पुनर्गठित पोर्टल का शुभारंभ कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार और विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की महानिदेशक प्रियंका भारती, इंडिया-एआई मिशन के सीओओ सुदीप श्रीवास्तव और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
कानून तक आसान पहुंच पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान के महत्व और कानूनों को सभी हितधारकों के लिए आसानी से उपलब्ध एवं समझने योग्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंडिया कोड पोर्टल संविधान, केंद्रीय अधिनियमों, नियमों और अन्य विधायी जानकारियों तक नागरिकों की आसान पहुंच के लिए एक विश्वसनीय और व्यापक मंच के रूप में काम करता है।
तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
मेघवाल ने कानून तक पहुंच को मजबूत करने में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पोर्टल के पुनर्गठन की परिकल्पना, समन्वय और निगरानी के लिए विधायी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञता और विकास सहायता के लिए एनआईसी की टीम को भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि साझा प्रयासों से विधायी जानकारी की सुलभता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित वितरण में सुधार होगा।
अटॉर्नी जनरल ने डिजिटल बदलाव को सराहा
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कानूनों तक भौतिक माध्यम से डिजिटल पहुंच की ओर हुए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने नई और यूजर-फ्रेंडली सुविधाओं के साथ विकसित किए गए पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल की सराहना की। उन्होंने पोर्टल को तकनीकी रूप से अपडेटेड रखने और बदलती जरूरतों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुणवत्तापूर्ण कानून बनाने की जिम्मेदारी
वेंकटरमणी ने स्पष्ट, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कानून बनाने में विधायी अधिकारियों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कानूनों तक व्यापक और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित करने को जरूरी बताया। अटॉर्नी जनरल ने पोर्टल के विकास में विधायी विभाग और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे विधायी जानकारी में पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच और मजबूत होगी।
यूजर-फ्रेंडली बनाया गया पोर्टल
विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने इंडिया कोड पोर्टल के विकासक्रम की जानकारी दी। उन्होंने नागरिकों, कानूनी पेशेवरों, सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के लिए प्रामाणिक एवं अपडेटेड विधायी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पोर्टल में यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ सर्च, नेविगेशन और एक्सेसिबिलिटी को बेहतर बनाया गया है।
कानून से न्याय तक पहुंच का पहला कदम
विधायी विभाग के अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कानून तक पहुंच न्याय तक पहुंच की दिशा में पहला कदम है। कानून केवल उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे खोजना, नेविगेट करना, समझना और इस्तेमाल करना भी आसान होना चाहिए।
एआई और स्पीच सर्च की सुविधा
पुनर्गठित पोर्टल में एआई-असिस्टेड और सेमांटिक सर्च के साथ स्पीच-सक्षम खोज की सुविधा दी गई है। इससे उपयोगकर्ता सामान्य शब्दों या अपनी आवाज के जरिए भी आवश्यक कानूनी जानकारी खोज सकेंगे। बेहतर सर्च और नेविगेशन के अलावा अधिनियमों और अधीनस्थ विधानों के बीच लिंक उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे संबंधित कानूनी प्रावधानों तक पहुंच आसान होगी।
22 भाषाओं में कानूनों तक पहुंच
इंडिया कोड केंद्रीय अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों, राज्य अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के विधानों और विनियमों का यूनिफाइड डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है। पुनर्गठित पोर्टल का उद्देश्य संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में एआई-सहायता प्राप्त बहुभाषी पहुंच उपलब्ध कराना भी है।
ई-गजट से जुड़ा पोर्टल
पोर्टल में ई-गजट इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसके अलावा संशोधनों और विधायी इतिहास तक पहुंच, अधिनियमों को संबंधित अधीनस्थ विधानों से जोड़ने, बेहतर डॉक्यूमेंट व्यूइंग और क्यूआर-इनेबल्ड एक्सेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नागरिकों की प्रतिक्रिया के लिए व्यवस्थित फीडबैक सिस्टम भी विकसित किया गया है।
कानून का डिजिटल गेटवे बनाने की कोशिश
सरकार का उद्देश्य इंडिया कोड को केवल कानूनों के ऑनलाइन संग्रह तक सीमित रखने के बजाय एक परस्पर जुड़े, खोजने योग्य और नागरिक-अनुकूल कानूनी सूचना ढांचे के रूप में विकसित करना है। नए पोर्टल के जरिए कानून और नागरिकों के बीच तकनीकी दूरी कम करने तथा विधायी जानकारी को अधिक उपयोगी और इंटरऑपरेबल बनाने की कोशिश की गई है।
पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस को बढ़ावा
पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल कानून तक पहुंच की सुगमता, पारदर्शिता, व्यापक नागरिक भागीदारी और कानूनी व सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण के लिए तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारत में एक विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम कानूनी सूचना इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेगा, जहां कानून नागरिकों को उनकी सुविधा के अनुसार भाषा और डिजिटल माध्यम में अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।




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