संसद में पेपर लीक पर चर्चा से भागने वाला विपक्ष अब बताए, पंजाब के छात्रों के साथ हुए अन्याय पर उसकी चुप्पी क्यों?

14 August, 2026, 12:27 pm



चंडीगढ़, 14 अगस्त 2026 भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के आदेश को पंजाब के लाखों युवाओं की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि इस आदेश ने भगवंत मान सरकार के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें वह लगातार पेपर लीक के गंभीर आरोपों को नकारती रही। उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा को लेकर छात्र महीनों से सवाल उठा रहे थे, सरकार उसे केवल इर्रेगुलैरिटी बताकर मामले को दबाने में लगी रही, लेकिन अब न्यायपालिका ने उसी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए इसे रोक दिया है।

तरुण चुग ने कहा कि जुलाई 2026 में पंजाब में 454 फार्मेसी ऑफिसर पदों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक और प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने के गंभीर आरोप सामने आए। हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में आम आदमी पार्टी सरकार ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय इसे महज इर्रेगुलैरिटी बताकर पल्ला झाड़ लिया। सरकार ने कुछ कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी को ही कार्रवाई बताकर री-एग्जामिनेशन से भी इनकार कर दिया। अंततः छात्रों और अभ्यर्थियों को न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि आज हाईकोर्ट की कार्यवाही ने सरकार के पूरे रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने परीक्षा प्रक्रिया पर रोक लगाई है और इसके परिणाम घोषित करने पर भी रोक लग गई है। चुग ने कहा कि सरकार यदि शुरू से ही छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेती, निष्पक्ष जांच कराती और परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करती, तो हजारों युवाओं को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ता।

तरुण चुग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार को अब पंजाब के युवाओं को जवाब देना चाहिए कि जब पेपर लीक के इतने गंभीर आरोप सामने आए थे, तब सरकार ने री-एग्जामिनेशन से इनकार क्यों किया? छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? और अदालत के हस्तक्षेप की नौबत क्यों आई? उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़ी परीक्षा को राजनीतिक बचाव और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ाना किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक है।

चुग ने कहा कि एक तरफ पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार पेपर लीक के आरोपों को नकारती रही, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने देशभर में परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर स्पष्ट और कठोर कदम उठाए हैं। नीट परीक्षा को लेकर संसद में चर्चा की मांग उठी तो केंद्र सरकार ने चर्चा से भागने के बजाय सदन में जवाब दिया और परीक्षा व्यवस्था में अनुचित साधनों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया। इसके साथ ही परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित की गई है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं संसद में स्पष्ट किया था कि सरकार पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था कि अध्यक्ष जितना समय देंगे, वे स्वयं सदन में बैठकर चर्चा सुनेंगे, प्रत्येक बिंदु को नोट करेंगे और अगले दिन बिंदुवार जवाब देंगे। इसके बावजूद राहुल गांधी और विपक्ष ने चर्चा को आगे बढ़ाने के बजाय संसद को बाधित करने का रास्ता चुना।

तरुण चुग ने कहा कि अब पंजाब में हाईकोर्ट की कार्यवाही ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी से सच्चाई नहीं दबाई जा सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित था, तो उसे संसद में बैठकर परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन विपक्ष ने चर्चा से भागना पसंद किया।

चुग ने जोड़ा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों को यह बताना चाहिए कि जिन छात्रों के भविष्य की बात वे संसद में करते हैं, उन्हीं छात्रों के साथ उनकी अपनी राज्य सरकारों में क्या व्यवहार हो रहा है। पंजाब में हजारों अभ्यर्थी न्याय के लिए अदालत पहुंचे हैं और झारखंड में भी छात्र आंदोलनों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की छात्र विरोधी राजनीति का सबसे बड़ा नुकसान देश के उन युवाओं को हो रहा है, जो वर्षों की मेहनत के बाद एक परीक्षा में अपना भविष्य तलाशते हैं।

तरुण चुग ने कहा कि परीक्षा केवल एक प्रश्नपत्र नहीं होती, वह लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत, उनके परिवारों की उम्मीद और उनके भविष्य का सवाल होती है। जो सरकार इस भरोसे की रक्षा नहीं कर सकती, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा अब सरकार की बातों से नहीं, अदालत के आदेश और जमीन पर हुई कार्रवाई से सच्चाई को समझ रहे हैं और भगवंत मान सरकार को इसका जवाब देना होगा।

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