रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की बदहाल तस्वीर, 512 में से 458 स्टेशनों पर मानकों की अनदेखी

16 August, 2026, 3:45 pm

 

रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक( कैग) रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश में चयनित 512 रेलवे स्टेशनों में से 458 स्टेशन यानी करीब 89 प्रतिशत स्टेशन निर्धारित मानकों के अनुरूप यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल पाए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए 451 स्टेशनों पर कम से कम एक या उससे अधिक जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आई। इनमें पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे, वाटर कूलर और साइन बोर्ड जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं।

चिंता की बात यह है कि कमियां केवल छोटे या कम यात्री दबाव वाले स्टेशनों तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट में NSG-1 से NSG-3 श्रेणी के अधिक कमाई और ज्यादा भीड़ वाले स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं की कमी का उल्लेख किया गया है। यानी जिन स्टेशनों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं, वहां भी रेलवे के निर्धारित मानकों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

वाटर कूलर के पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल

रिपोर्ट में कुछ स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने का उल्लेख किया गया है। इनमें दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्व रेलवे का मधुपुर स्टेशन शामिल हैं।

यदि सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के नमूनों में ऐसे बैक्टीरिया मिलते हैं, तो यह केवल सुविधा की कमी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि सीधे यात्री स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वच्छता से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

 शौचालयों की स्वच्छता भी चिंता का विषय

 कैग रिपोर्ट में कटनी रेलवे स्टेशन के वॉशरूम में भी अस्वच्छ परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि रेलवे स्टेशनों पर केवल नई सुविधाएं स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। उनका नियमित रखरखाव, सफाई, पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

सवाल सिर्फ सुविधाओं की कमी का नहीं

इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के लिए बनाए गए मानकों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर सामने आया है। रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में से एक है और रोज करोड़ों लोग इसकी सेवाओं पर निर्भर हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि जब किसी स्टेशन को निर्धारित श्रेणी और मानकों के आधार पर यात्री सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं, तो उनकी नियमित निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

यात्री सुविधाओं में सुधार केवल सौंदर्यीकरण या स्टेशन के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए। साफ शौचालय, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल, बैठने की जगह, पर्याप्त पंखे, प्लेटफॉर्म शेल्टर और स्पष्ट साइन बोर्ड जैसी सुविधाएं यात्रियों की बुनियादी जरूरतें हैं।

रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश की बात हो रही है। इसलिए अब असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बजट और योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर यात्री को दिखाई भी दे।

कुल मिलाकर, 512 स्टेशनों के अध्ययन में सामने आई तस्वीर रेलवे के सामने एक स्पष्ट चुनौती रखती है—स्टेशन का आधुनिकीकरण केवल इमारत और इंफ्रास्ट्रक्चर का नहीं, बल्कि यात्री अनुभव, स्वच्छता, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता का भी होना चाहिए।

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