आईजीएनसीए में हरियाली तीज के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित

20 August, 2026, 8:51 pm

नई दिल्ली, 20 अगस्त, गुरुवार।


इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के जनपद सम्पदा विभाग द्वारा हरियाली तीज के अवसर पर वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय लोकजीवन, परंपराओं, खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की विविधता को प्रदर्शनी, विशेष व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा तीज बाजार के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ‘पैडी कल्चर ऑफ इंडिया’ प्रदर्शनी और तीज बाजार से हुआ। प्रदर्शनी में भारतीय खाद्य परंपराओं और विविध क्षेत्रों की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। तीज बाजार में पारंपरिक वस्तुओं और लोक-संस्कृति से जुड़े उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।


इस अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में इग्नू के सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ की पूर्व निदेशक प्रो. रश्मि सिन्हा, इग्नू की प्रो. नंदिनी सिन्हा कपूर और शिक्षाविद् कहानीकार एवं लेखिका श्रीमती मालविका जोशी ने भी सहभागिता की। व्याख्यान का विषय था- ‘हरियाली तीज: उत्तर भारत में ऐतिहासिक परम्पराएं, क्षेत्रीय रीति-रिवाज और कृषि सम्बंधी महत्व’ और मुख्य वक्ता थीं इग्नू की प्रो. नंदिनी सिन्हा कपूर। वक्ताओं ने तीज पर्व की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, भारतीय लोक परंपराओं में महिलाओं की भूमिका तथा लोक उत्सवों के माध्यम से जीवंत होती सांस्कृतिक विरासत पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान अतिथियों ने जनपद सम्पदा विभाग द्वारा प्रकाशित पांच पुस्तकों और विभाग द्वारा निर्मित तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लोकार्पण भी किया गया। 


श्रीमती लता गुप्ता ने इस अवसर पर कहा, जनपद सम्पदा विभाग हमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई भी पर्व नहीं है, जिसमें महिलाओं की सहभागिता और योगदान न हो। पर्व संस्कृति के संवाहक होते हैं और हरियाली तीज इस सांस्कृतिक निरंतरता की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति हमारे भाव को भी अभिव्यक्त करता है।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं देश की संस्कृति और विरासत की संवाहक हैं तथा इस धारणा को बदलने की आवश्यकता है कि महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन होती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अन्य महिलाओं की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील होती हैं और परिवार तथा समाज के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा, एक स्त्री खिलखिलाती है, तो परिवार ही नहीं खिलखिलाता, समाज और राष्ट्र भी खिलखिलाता है। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक समरसता को बनाए रखने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित किया।


श्रीमती मालविका जोशी ने कहा, हमारे हर त्योहार के पीछे बहुत वैज्ञानिक कारण होते हैं। अन्य वक्ताओं ने कहा कि भारतीय पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति, लोकाचार, कला, संगीत, खान-पान और सामाजिक संबंधों को अभिव्यक्त करने वाले महत्वपूर्ण सांस्कृतिक माध्यम हैं। तीज जैसे पर्व लोक परम्पराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उन्हें जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने तीज की पारंपरिक लोकभावना और उल्लास को जीवंत किया। उत्तराखंड के मानीला सांस्कृतिक ग्रूप के कलाकारों ने उत्तराखंड के लोकगीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को आनंदविभोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला, संस्कृति और लोक परंपराओं में रुचि रखने वाले लोगों ने सहभागिता की।


कार्यक्रम के प्रारंभ में जनपद सम्पदा प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार ने अतिथियों एवं उपस्थित दर्शकों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। साथ ही, विभाग द्वारा पिछले वर्ष कराए गए कार्यक्रमों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने भारतीय लोक संस्कृति की विविधता और उसकी जीवंत परम्पराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का सार्थक प्रयास किया।

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