मणिपुर में वार्ता से समस्या के हल का रास्ता तलाशेंगे: राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन

22 August, 2026, 4:38 pm

 

नई दिल्ली। मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी हिंसा, विस्थापन और सामाजिक-आर्थिक अस्थिरता के मुद्दे पर राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने संत समाज, विभिन्न हिंदू संगठनों तथा मणिपुर के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोहन गिरि ने मणिपुर संकट के स्थायी समाधान के लिए स्वयं मणिपुर जाकर स्थानीय समाज, मूल निवासियों और शांतिप्रिय वर्गों से संवाद करने की घोषणा की। उन्होंने इस उद्देश्य से ‘चलो मणिपुर’ अभियान का आह्वान भी किया।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सोहन गिरि ने कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति केवल आश्वासनों या सतही वार्ताओं से संभव नहीं है। सरकार को अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर ठोस निर्णय लेना होगा। उन्होंने कहा कि 1951 को आधार वर्ष मानकर संपूर्ण मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अद्यतन किया जाना चाहिए और इसके बाद ही जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वार्ता के माध्यम से समाधान का ठोस रास्ता निकालने के लिए वह स्वयं मणिपुर जाएंगे और वहां के विभिन्न वर्गों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगे। उनके अनुसार, प्रत्येक नागरिक की पहचान सुनिश्चित किए बिना शांति की कोशिशें अधूरी रहेंगी।

प्रेस वार्ता में स्वामी धनंजय जी, साधु राम तिवारी, मुकेश जैन (राष्ट्रीय अध्यक्ष, दारा सेना) और नेत्रपाल शर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री राम सेना) सहित संत समाज एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मणिपुर की जमीनी परिस्थितियों और मूल निवासियों की समस्याओं पर सांता नाहाकपम, महामंत्री, यूनाइटेड कमेटी ऑफ मणिपुर तथा डॉ. कम्मेई हीरा कबुई, अध्यक्ष, कबुई यूनियन मणिपुर ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन एम. इंद्रजीत सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

संगठन ने मणिपुर में बंद पड़े राष्ट्रीय राजमार्गों को तत्काल बहाल करने, विस्थापितों को सुरक्षा और सम्मान के साथ उनके मूल निवास स्थानों पर पुनर्स्थापित करने तथा हिंसा और अराजकता फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रेस वार्ता में संगठन की ओर से ‘पहले एनआरसी, फिर जनगणना’ को प्रमुख मांग बताते हुए मणिपुर के मूल निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही ‘चलो मणिपुर’ अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को संवाद और शांति की दिशा में आगे आने का आह्वान किया गया।

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