Jehangir Art Gallery में सोलो प्रदर्शनी “Purakalpah: Adbhut Rasa – Sacred Portal to the Divinity Within” शुरू

24 August, 2026, 9:33 pm

प्रतिमा अंभगे की कला में भारतीय दर्शन और पुराणों का अद्भुत संसार

मुंबई, 24 अगस्त 2026।   भारतीय दर्शन, संस्कृति और पुराणों की गहरी संवेदनाओं को समकालीन कला के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाली जानी-मानी कलाकार एवं लेखिका प्रतिमा अंभगे की सोलो आर्ट एग्जिबिशन “Purakalpah: Adbhut Rasa – Sacred Portal to the Divinity Within  मुंबई की प्रतिष्ठित कला दीर्धा  Jehangir Art Gallery  में शुरू हो गई है। यह प्रदर्शनी 30 अगस्त 2026 तक कला प्रेमियों और दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर निधि चौधरी, निदेशक, National Gallery of Modern Art, Mumbai, Ministry of Culture, Government of India मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर राजेन्द्र पाटिल, डायरेक्टर, India Art Festival, जाने-माने लेखक एवं कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल, contemporary artist एवं fine art education expert Maruti Shelke सहित कला, संस्कृति और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।

प्रतिमा अंभगे की कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक चिंतन को केवल अतीत के संदर्भ के रूप में प्रस्तुत नहीं करतीं, बल्कि उन्हें आधुनिक संवेदना और दृश्य भाषा के साथ जोड़कर दर्शकों के सामने रखती हैं। उनके कैनवास पर भारतीय पुराणों के पात्र, प्रतीक और प्रसंग एक नए अर्थ संसार के साथ दिखाई देते हैं।

“Purakalpah” इसी कलात्मक यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। शीर्षक में निहित ‘पुराकल्प’ भारतीय पुराण, स्मृति और कल्पना के उस संसार की ओर संकेत करता है, जहां मिथक केवल धार्मिक आख्यान नहीं रह जाते, बल्कि मानव जीवन, चेतना, संघर्ष, सृजन और आध्यात्मिक यात्रा के प्रतीक बन जाते हैं।

प्रतिमा अंभगे की कला में भारतीय दर्शन, संस्कृति और पुराणों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके लिए मिथकीय कथाएं वर्तमान से संवाद करने का माध्यम हैं। यही कारण है कि उनके चित्रों में पौराणिक प्रसंगों के साथ-साथ भाव, ऊर्जा, आध्यात्मिकता और मानवीय अनुभव की परतें भी दिखाई देती हैं।

इससे पहले ललित कला अकादमी में आयोजित उनकी एकल प्रदर्शनी “पूराकल्प” को कला जगत में काफी सराहना मिली थी। उस प्रदर्शनी में उनके कई महत्वपूर्ण काम ने दर्शकों और कला समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया था। विशेष रूप से समुद्र मंथन’, ‘जानकी लिफ्टिंग’ और ‘शिव धनुष’ जैसी कलाकृतियों  को उल्लेखनीय प्रतिक्रिया मिली थी।

‘समुद्र मंथन’ जैसे पौराणिक प्रसंग को प्रतिमा अंभगे जिस तरह अपनी दृश्य भाषा में रूपांतरित करती हैं, उसमें केवल देव-असुर संघर्ष का आख्यान नहीं बल्कि जीवन में मौजूद द्वंद्व, मंथन और उससे निकलने वाले अमृत की दार्शनिक अवधारणा भी दिखाई देती है। इसी तरह ‘जानकी लिफ्टिंग’ और ‘शिव धनुष’ जैसे आर्ट वर्क भारतीय महाकाव्य और पुराण परंपरा को नए कलात्मक संदर्भों में देखने का अवसर देते हैं।

प्रतिमा अंभगे कलाकार होने के साथ लेखिका भी हैं, इसलिए उनकी कला में कथा और दृश्य अभिव्यक्ति का एक स्वाभाविक संबंध दिखाई देता है। उनके आर्ट वर्क को केवल रंग, आकृति और संरचना के स्तर पर देखना पर्याप्त नहीं है; प्रत्येक कृति के पीछे एक कथा, प्रतीक और वैचारिक संदर्भ मौजूद है। यही उनकी कला को समकालीन भारतीय कला परिदृश्य में विशिष्ट पहचान देता है।

“Adbhut Rasa – Sacred Portal to the Divinity Within” शीर्षक भी उनकी कला की इसी मूल भावना को सामने लाता है। ‘अद्भुत रस’ के माध्यम से दर्शक के भीतर विस्मय, जिज्ञासा और आध्यात्मिक अनुभूति का संचार करना इस प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। यहां कला बाहरी दृश्य संसार से आगे बढ़कर व्यक्ति को उसके भीतर मौजूद आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का प्रयास करती दिखाई देती है।

उद्घाटन समारोह में मौजूद कला जगत की हस्तियों ने भी प्रतिमा अंभगे की इस कलात्मक यात्रा और भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन कला के माध्यम से प्रस्तुत करने के प्रयास को महत्वपूर्ण बताया।

मुंबई की Jehangir Art Gallery में आयोजित यह प्रदर्शनी उन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है, जो भारतीय पौराणिक आख्यानों, दर्शन और समकालीन कला के बीच बनने वाले नए संवाद को समझना चाहते हैं। 30 अगस्त तक चलने वाली यह प्रदर्शनी भारतीय मिथक, आध्यात्मिकता और आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति के संगम का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।

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