हवा को रंगों में महसूस करने की कोशिश है दुर्गेश बिरथरे की ‘Imaginative Memory’

रिपोर्ट- नरेश वत्स
नई दिल्ली। राजधानी के Triveni Kala Sangam स्थित Shridharani Gallery में कलाकार दुर्गेश बिरथरे की सोलो पेंटिंग प्रदर्शनी ‘Imaginative Memory’ कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रदर्शनी में प्रकृति केवल एक दृश्य के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव और स्मृति के रूप में सामने आती है।
दुर्गेश बिरथरे ने अपनी पेंटिंग्स में प्रकृति के प्रमुख तत्व ‘हवा’ को केंद्र में रखा है। हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका अनुभव किया जा सकता है। कलाकार ने इसी अदृश्य तत्व को अलग-अलग रंगों, बिंदुओं और स्ट्रोक्स के माध्यम से कैनवास पर महसूस कराने की कोशिश की है।
ब्रॉडकास्ट मंत्रा से बातचीत में दुर्गेश बिरथरे ने बताया कि शुरुआत में वे लैंडस्केप पेंटिंग किया करते थे। उनके लिए प्रकृति हमेशा से एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। उनका मानना है कि प्रकृति को जितना ध्यान से देखा जाए, उसमें उतनी ही नई चीजें दिखाई देती हैं।
उनकी पेंटिंग्स में दिखाई देने वाले डॉट्स और स्ट्रोक्स भी इसी अनुभव का हिस्सा हैं। कलाकार के अनुसार, आम दर्शक को प्रकृति की इन बारीकियों को समझने और महसूस करने के लिए थोड़ा जागरूक होना जरूरी है।
मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र से आने वाले दुर्गेश के कला संसार में रंगों की विशेष भूमिका है। वे मानते हैं कि मालवा की संस्कृति और परिवेश में रंगों का अपना अलग महत्व है। एक कलाकार के तौर पर उनकी कोशिश रहती है कि हर पेंटिंग में कोई नया रंग, नया अनुभव और नई दृष्टि दिखाई दे।
अपने अनुभवों को याद करते हुए वे बताते हैं कि जब वे पहली बार भेड़ाघाट गए थे तो वहां प्रकृति में दिखाई देने वाले चमकते और बदलते रंगों ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। उन रंगों की स्मृति आज भी उनकी पेंटिंग्स में दिखाई देती है।
दुर्गेश की कला केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है। उनके लिए जलवायु परिवर्तन, जंगलों का खत्म होना और लोगों का शहरों की ओर बढ़ता पलायन भी चिंता के विषय हैं। यही वजह है कि उनकी आगामी कला यात्रा में पर्यावरण और बदलती प्रकृति के सवाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।
उनका कहना है कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और उन्हें धैर्य के साथ देखना और समझना चाहिए। शायद यही दृष्टि उनकी पेंटिंग्स में भी दिखाई देती है—जहां रंग स्थिर नहीं हैं, बल्कि हवा की तरह लगातार गति और परिवर्तन का एहसास कराते हैं।
‘Imaginative Memory’ इस मायने में सिर्फ पेंटिंग्स की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रकृति को देखने, महसूस करने और उसके बदलते स्वरूप पर विचार करने का एक अवसर है। दुर्गेश बिरथरे का कैनवास दर्शक से सवाल करता है—जिस हवा को हम हर पल महसूस करते हैं, क्या हम वास्तव में उसे देख और समझ पाते हैं?









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