मशरूम के जरिए प्रकृति को देखने का नया नजरिया, शंभूनाथ गोस्वामी की कला में चटख रंगों का संसार

रिपोर्ट - नरेश वत्स
नई दिल्ली। कला में प्रकृति का चित्रण कोई नई बात नहीं, लेकिन कलाकार शंभूनाथ गोस्वामी प्रकृति को देखने और उसे कैनवास पर उतारने के लिए एक अलग दृश्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उनकी कलाकृतियों में मशरूम महज प्राकृतिक आकृति नहीं, बल्कि प्रकृति की विविधता और उसके जीवंत संसार को व्यक्त करने का माध्यम बनकर सामने आते हैं।
ललित कला अकादमी, रविंद्र भवन, नई दिल्ली में आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में गोस्वामी की कलाकृतियां दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। उनकी पेंटिंग्स में मशरूम की आकृतियां, जैविक रूप और प्रकृति के दूसरे तत्व आपस में घुलते-मिलते दिखाई देते हैं।
चटख रंगों में प्रकृति की जीवंत अभिव्यक्ति
शंभूनाथ गोस्वामी की कला की खास पहचान उनके चटख और प्रभावशाली रंगों का प्रयोग है। लाल, नारंगी, नीले और पीले जैसे रंग उनकी रचनाओं में प्रकृति को एक अलग ऊर्जा प्रदान करते हैं। मशरूम की विभिन्न आकृतियों के साथ रंगों का यह प्रयोग कलाकृति को केवल देखने योग्य नहीं बनाता, बल्कि दर्शक को उसके भीतर मौजूद प्राकृतिक संसार को महसूस करने के लिए भी प्रेरित करता है।
उनकी पेंटिंग्स में प्रकृति का यथार्थवादी चित्रण करने के बजाय उसे रंग, आकृति और कल्पना के माध्यम से पुनः प्रस्तुत करने का प्रयास दिखाई देता है।
मशरूम क्यों बना अभिव्यक्ति का माध्यम?
मशरूम प्रकृति के ऐसे जीव हैं जिन्हें अक्सर हम सामान्य नजर से देखते हैं, लेकिन गोस्वामी की कलात्मक दृष्टि उन्हें केंद्र में लेकर प्रकृति के एक व्यापक संसार को सामने लाती है। उनकी रचनाओं में मशरूम के साथ दिखाई देने वाले जैविक पैटर्न और रंग प्रकृति की जटिलता और विविधता की ओर संकेत करते हैं।
यही उनकी कला को दिलचस्प बनाता है—एक छोटा-सा प्राकृतिक तत्व कैनवास पर पूरी प्रकृति की कहानी कहने लगता है।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 270 कलाकृतियां
इस वर्ष की 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में देशभर से चयनित 270 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। अलग-अलग कलाकारों की रचनाएं भारतीय दृश्य कला में मौजूद विविध विचारों, तकनीकों और समकालीन प्रयोगों को सामने रखती हैं।
इस प्रदर्शनी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि यहां प्रदर्शित कलाकृतियां कला प्रेमियों और कला संग्राहकों के लिए अधिग्रहण/खरीद हेतु उपलब्ध हैं। यानी दर्शक केवल प्रदर्शनी देखकर लौटने के बजाय अपनी पसंद की कलाकृति को अपने निजी संग्रह का हिस्सा भी बना सकते हैं।
शंभूनाथ गोस्वामी की कला का सवाल
गोस्वामी की कलाकृतियां एक सहज लेकिन महत्वपूर्ण सवाल सामने रखती हैं—क्या प्रकृति को देखने के लिए हमें हमेशा बड़े दृश्यों की जरूरत है? शायद नहीं। कभी-कभी मशरूम जैसी छोटी और सामान्य दिखाई देने वाली आकृति भी प्रकृति की विशालता, रंगों और जीवन की विविधता को व्यक्त करने का माध्यम बन सकती है।
शंभूनाथ गोस्वामी की कला इसी दृष्टि को चटख रंगों और कल्पनाशील संरचनाओं के जरिए सामने लाती है।
Broadcast Mantra की कला और संस्कृति से जुड़ी यह रिपोर्ट कलाकारों की रचनात्मक दुनिया और उन प्रयोगों को दर्शकों तक पहुंचाने की एक पहल है, जो भारतीय समकालीन कला को लगातार नया स्वरूप दे रहे हैं।









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