मंगल के चंद्रमा फोबोस पर पहली बार उतरेगा रोवर, अक्टूबर में होगा मिशन लॉन्च

31 August, 2026, 11:38 pm


बर्लिन 31 अगस्त। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक ऐतिहासिक मिशन की तैयारी पूरी हो रही है। जापान की Martian Moons eXploration (MMX) मिशन के तहत जर्मनी और फ्रांस का छोटा रोवर ‘Idefix’ मंगल के चंद्रमा फोबोस की सतह पर उतरने वाला पहला रोवर बनने जा रहा है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA की योजना के मुताबिक मिशन का प्रक्षेपण 19 अक्टूबर 2026 को किया जाना है। लॉन्च विंडो 7 नवंबर तक खुली रहेगी।

जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) के मुताबिक MMX मिशन लगभग एक वर्ष की यात्रा के बाद 2027 में मंगल की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद 2029 में Idefix को फोबोस की सतह से करीब 40 मीटर की ऊंचाई से छोड़ा जाएगा। रोवर कमजोर गुरुत्वाकर्षण के कारण बिना किसी अलग लैंडिंग वाहन की मदद के सीधे सतह पर उतर सकेगा।

 25 किलो का रोवर करेगा ऐतिहासिक खोज

Idefix का आकार लगभग एक पेय पदार्थ की क्रेट जितना है और इसका वजन करीब 25 किलोग्राम है। आकार छोटा होने के बावजूद इसमें एक पूर्ण वैज्ञानिक रोवर के लिए जरूरी प्रमुख उपकरण मौजूद हैं।

फोबोस की सतह पर उतरने के बाद रोवर खुद को स्वायत्त रूप से सीधा करेगा और करीब 100 दिनों तक वहां की सतह का अध्ययन करेगा। इस दौरान यह फोबोस की मिट्टी, सतह और भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाएगा।

Idefix नाम फ्रांसीसी कॉमिक ‘Asterix’ के छोटे सफेद कुत्ते के नाम पर रखा गया है, जिसे अंग्रेजी में Dogmatix कहा जाता है।

 2031 में पृथ्वी पर आएंगे फोबोस के नमूने

MMX मिशन का एक और बड़ा लक्ष्य फोबोस से नमूने पृथ्वी पर वापस लाना है। योजना के मुताबिक मिशन 2031 में फोबोस के नमूने पृथ्वी पर लाएगा। यह मंगल प्रणाली से पृथ्वी पर लौटाए जाने वाले पहले नमूने होंगे।

फोबोस और डीमोस मंगल के दो छोटे प्राकृतिक उपग्रह हैं। फोबोस की अधिकतम चौड़ाई करीब 27 किलोमीटर, जबकि डीमोस लगभग 15 किलोमीटर चौड़ा है। दोनों पृथ्वी के चंद्रमा की तुलना में बहुत छोटे और अनियमित आकार के हैं।

फोबोस पर तापमान में भी अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है और यह लगभग -170 डिग्री सेल्सियस से 70 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है।

 वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फोबोस?

इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि फोबोस और डीमोस वास्तव में हैं क्या?  वैज्ञानिकों के सामने दो प्रमुख संभावनाएं हैं—क्या ये दोनों मंगल के गुरुत्वाकर्षण में फंसे हुए क्षुद्रग्रह हैं, या फिर अरबों वर्ष पहले मंगल से हुई किसी विशाल टक्कर के बाद अंतरिक्ष में उछले मलबे से इनका निर्माण हुआ?

Idefix और MMX मिशन से मिलने वाले आंकड़े और फोबोस के नमूने इस रहस्य को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यह मिशन सिर्फ मंगल के दो छोटे चंद्रमाओं की खोज नहीं है, बल्कि सौरमंडल के निर्माण और मंगल के इतिहास को समझने की दिशा में भी एक बड़ा वैज्ञानिक कदम माना जा रहा है।

Source: DPA News Agency

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