राष्ट्रभक्ति से बड़ी कोई भक्ति नहीं - लेफ्टिनेंट जनरल वी. के. चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त)
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नई दिल्ली, 3 सितंबर, गुरुवार ।इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि विभाग द्वारा प्रवीण के. शुक्ल की पुस्तक ‘नव-चिंतन : विचार से अनुभूति तक’ के लोकर्पण समारोह का आयोजन किया गया। इसे प्रकाशित किया है प्रभात प्रकाशन ने। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे आईजीएनसीए के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल वी. के. चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) उपस्थित रहे। आईजीएनसीए के कलानिधि प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार एवं भाषाविद् श्री संत समीर विशिष्ट अतिथि एवं सूत्र-संचालक रहे। पुस्तक के लेखक श्री प्रवीण के. शुक्ल ने पुस्तक की विषयवस्तु और इसकी संकल्पना पर प्रकाश डाला।
विचारों से व्यक्तित्व बनता है।
श्री रामबहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक आदर्शवाद की प्रस्तुति है। यह पुस्तक नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने हिंदी प्रकाशन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी के प्रकाशक हिंदी की किताबों को उस तरह से पाठकों तक नहीं पहुंचाते, जैसे मराठी और बंगाली के प्रकाशक करते हैं। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल वी. के. चतुर्वेदी ने कहा, भाव और विचार ऐसी चीजें हैं, जो हमें अपने पूर्वजों, माता पिता, गुरुजनों और परिवेश से मिलते हैं। विचारों से व्यक्तित्व बनता है।
राष्ट्रप्रेम से बड़ा कोई प्रेम नहीं है,
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र हमेशा सबसे पहले है। राष्ट्रप्रेम से बड़ा कोई प्रेम नहीं है, राष्ट्रगौरव से बड़ा कोई गौरव नहीं है, राष्ट्रसम्मान से बड़ा कोई सम्मान नहीं और राष्ट्रभक्ति से बड़ी कोई भक्ति नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हमें एक मजबूत नेता की आवश्यकता है और हमारे पास नरेंद्र मोदी के रूप में ऐसा मजबूत नेता है, जो राष्ट्रहित में कठोर निर्णय लेने की क्षमता रखता है। सके। उन्होंने आगे कहा, देश के पास एक मजबूत सेना भी होनी चाहिए – सब प्रकार के साधनों से सुसज्जित और पूरी तरह से प्रेरित। शास्त्र के साथ शस्त्र भी जरूरी है।
लेखक प्रवीण के. शुक्ल ने कहा कि अनुभूति जो होती है, वह अपने भीतर होती है। इस पुस्तक में कविताएं हैं, विचार हैं और टेड-टॉक्स हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान समय में, जब नई पीढ़ी तेजी से बदलती तकनीक और सूचना के संसार से जुड़ रही है, ऐसे में गहन विचारों को सहज और आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसी दृष्टि से पुस्तक में अंग्रेजी हैशटैग का अभिनव प्रयोग किया गया है, जो जेन जी और जेन अल्फा सहित नई पीढ़ी तक इसके विचारों को सहजता से पहुंचाने का प्रयास है।
प्रो. के. अनिल कुमार ने कहा, यह पुस्तक केवल विचारों का संकलन नहीं है, बल्कि विचारों को अनुभूति और जीवन में उतारने की आंतरिक यात्रा है। उन्होंने इस परिचर्चा को जीवंत, विचारोत्तेजक और प्रेरक बताते हुए कहा, आईजीएनसीए में हमारा मानना है कि ज्ञान केवल बौद्धिक न रहे, बल्कि अनुभति में परिवर्तित हो। कार्यक्रम के अंत में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद श्री दिनेश शर्मा का वीडियो संदेश सुनाया गया, जिसमें उन्होंने पुस्तक की उपादेयता पर अपने विचार प्रकट किए। गौरतलब है कि दिनेश शर्मा इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, लेकिन अपरिहार्य कारणों से नहीं आ सके।
वक्ताओं ने ‘नव-चिंतन : विचार से अनुभूति तक’ व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, स्वयं को समझने और जीवन को एक नई दृष्टि से देखने के लिए प्रेरित करती है। इसमें विचारों को केवल बौद्धिक स्तर पर ग्रहण करने के बजाय उन्हें अनुभूति में बदलने और जीवन के व्यवहार में उतारने पर बल दिया गया है। पुस्तक की मूल भावना यह है कि जब विचार चेतना का रूप लेते हैं और अनुभूति जीवन का हिस्सा बनती है, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।
वक्ताओं ने पुस्तक को आत्मचिंतन, मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक जीवन-दृष्टि की ओर ले जाने वाली कृति बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पाठक को केवल विचार देना नहीं, बल्कि उन विचारों को अपने जीवन में अनुभव करने और व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित करना है।

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