जर्मनी में बढ़ रहा जल संकट, सूखे के आंकड़े शामिल किए बिना भी स्थिति चिंताजनक

5 September, 2026, 10:54 pm

 

पॉट्सडैम, 5 सितंबर। जर्मनी और समूचे यूरोप में जल संकट पिछले कुछ महीनों में और गहरा गया है। पॉट्सडैम के भू-वैज्ञानिकों द्वारा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASAऔर जर्मन एयरोस्पेस सेंटर DLR*के सहयोग से किए गए अध्ययनों में यह सामने आया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य से अधिक बारिश होने की स्थिति में भी वर्ष के अंत तक जल भंडार पूरी तरह नहीं भर पाएंगे।

पॉट्सडैम स्थित हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, उपलब्ध आंकड़े जून तक के हैं। इसलिए इस साल गर्मियों में जर्मनी और यूरोप के कई हिस्सों में पड़ी भीषण गर्मी का प्रभाव इन आंकड़ों में अभी शामिल नहीं है। इसका वास्तविक असर आने वाले महीनों में सामने आएगा।

 2015 के बाद लगातार शुष्क होते हालात

GFZ की वैज्ञानिक एनेटे आइकर के अनुसार, 2015 से जर्मनी में पिछले 15 वर्षों की तुलना में लगातार अधिक शुष्क परिस्थितियां देखी जा रही हैं। वर्ष 2024 में औसत से अधिक बारिश के कारण जल भंडारण में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन इसके तुरंत बाद जल भंडार में फिर तेज गिरावट दर्ज की गई।

हाइड्रोलॉजी शोध समूह के प्रमुख एंड्रियास ग्यून्टर के मुताबिक, जर्मनी में दीर्घकालिक जल भंडारण में गिरावट के लिए भूजल भंडार का कम होना सबसे बड़ा कारण है।

 बारिश कम नहीं हुई, लेकिन पानी तेजी से वाष्पित हो रहा है

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि जर्मनी में वर्षा की मात्रा में लंबे समय से कोई स्पष्ट नकारात्मक रुझान नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद जल संकट बढ़ रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी बड़ी वजह बढ़ता तापमान है। तापमान बढ़ने के साथ संभावित वाष्पीकरण बढ़ रहा है, यानी जमीन और सतह से अधिक मात्रा में पानी वातावरण में पहुंच रहा है। इससे मिट्टी, नदियों और भूजल में उपलब्ध पानी पर दबाव बढ़ रहा है।

 उपग्रहों से हो रही जल भंडार की निगरानी

NASA और DLR के सहयोग से वैज्ञानिक पृथ्वी की सतह और उसके नीचे मौजूद कुल जल मात्रा की निगरानी कर रहे हैं। उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि विभिन्न क्षेत्रों में जल भंडारण क्षमता किस दिशा में बदल रही है।

ब्रांडेनबर्ग जैसे जर्मन राज्यों में पहले ही भूजल स्तर गिरने, प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की कमी और उद्योग तथा कृषि के लिए संभावित जल आपूर्ति संकट को लेकर चिंता बढ़ रही है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी स्पष्ट है—जल संकट को केवल कम बारिश से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। बढ़ता तापमान और उससे होने वाला अधिक वाष्पीकरण जर्मनी के जल भंडार पर दीर्घकालिक दबाव बना रहा है।

इनपुट (डीपीए)

लोकप्रिय