2029 तक जर्मनी में 7.23 लाख कुशल कामगारों का संकट

बर्लिन। जर्मनी की मजबूत अर्थव्यवस्था के सामने अब कुशल कामगारों की कमी बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट (IW) के अध्ययन के मुताबिक, 2029 तक देश में करीब 7.23 लाख कुशल कामगारों की कमी हो सकती है।
यह संकट तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में जर्मनी में करीब 3.70 लाख कुशल कामगारों की कमी थी। नए अनुमान के मुताबिक चार साल में यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो सकता है। यानी जर्मन उद्योग और सेवाओं को पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलना मुश्किल होगा।
सबसे ज्यादा असर बिक्री क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। अध्ययन के अनुसार 2029 तक करीब 39,100 पद खाली रह सकते हैं। इसके बाद बाल देखभाल और शिक्षा क्षेत्र में 29,900 तथा सामाजिक कार्य और सामाजिक शिक्षा में 23,600 कर्मचारियों की कमी का अनुमान है।
जर्मनी की स्वास्थ्य व्यवस्था और नर्सिंग क्षेत्र भी संकट से जूझ सकते हैं। यहां करीब 18,700 कुशल कर्मचारियों की कमी का अनुमान है। वहीं विद्युत निर्माण क्षेत्र में लगभग 17,400 पदों को भरना चुनौती बन सकता है।
इस संकट की सबसे बड़ी वजह जर्मनी की बढ़ती उम्रदराज आबादी है। आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में मौजूदा कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे, लेकिन उनकी जगह लेने के लिए पर्याप्त युवा श्रमशक्ति बाजार में प्रवेश नहीं करेगी।
विदेशी कामगारों पर निर्भरता बढ़ाना भी जर्मनी के लिए आसान नहीं होगा। अध्ययन के मुताबिक, आने वाले वर्षों में विदेशों से पर्याप्त कुशल कर्मचारियों को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जर्मनी को अपनी घरेलू कार्यशक्ति की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर देना होगा।
विडंबना यह है कि अर्थव्यवस्था में सुधार भी समस्या को बढ़ा सकता है। आर्थिक गतिविधियां तेज होने पर कंपनियों को और अधिक कर्मचारियों की जरूरत होगी। मांग बढ़ेगी, लेकिन उपलब्ध कुशल कामगारों की संख्या उस गति से नहीं बढ़ पाएगी।
IW का अनुमान 2029 तक के श्रम बाजार के रुझानों पर आधारित है और इसमें 2024 के अंत तक उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। जर्मनी के सामने अब चुनौती सिर्फ रोजगार पैदा करने की नहीं, बल्कि उन रोजगारों के लिए सही कौशल वाले लोगों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की है।
इनपुट -डीपीए


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