BRICS की सफलता के पीछे विदेश मंत्रालय की ‘साइलेंट टीम’, पर्दे के पीछे महीनों चली तैयारी
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नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन की सफलता ने वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक और आयोजन क्षमता की नई तस्वीर पेश की। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BRICS देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकातें, द्विपक्षीय बैठकें और अहम घोषणाएं सुर्खियों में रहीं, लेकिन इस पूरे आयोजन की सफलता के पीछे विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक बड़ी टीम लगातार पर्दे के पीछे सक्रिय रही।
BRICS 2026 जैसे बहुपक्षीय सम्मेलन की मेजबानी केवल दो दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं होती। इसके लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ लगातार संवाद, कार्यक्रमों का समन्वय, प्रोटोकॉल, सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल, मीडिया प्रबंधन, अनुवाद और दुभाषिया सेवाएं तथा नेताओं की द्विपक्षीय बैठकों की समय-सारिणी तैयार करना—इन सभी मोर्चों पर विदेश मंत्रालय की टीम को बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ा।
हर छोटी बारीकी पर नजर
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मंत्रियों के कार्यक्रम में छोटी-सी प्रोटोकॉल चूक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश दे सकती है। ऐसे में भारतीय अधिकारियों के सामने चुनौती केवल सम्मेलन को व्यवस्थित ढंग से आयोजित करने की नहीं थी, बल्कि अलग-अलग देशों की राजनीतिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाते हुए सभी प्रतिनिधिमंडलों को सहज वातावरण उपलब्ध कराने की भी थी।
विदेश मंत्रालय की टीम ने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के आगमन से लेकर उनके आवागमन, बैठकों, मीडिया संपर्क और कार्यक्रमों के दौरान लगातार समन्वय बनाए रखा। इसके साथ ही सम्मेलन स्थल भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण थी।
दुनिया भर से पहुंचे पत्रकार
BRICS 2026 सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पत्रकार दिल्ली पहुंचे। विदेशी मीडिया के लिए बनाए गए मीडिया सेंटर में काम करने वाले पत्रकारों को प्रेस ब्रीफिंग, सूचना, कार्यस्थल और कवरेज से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। विदेशी पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं में सम्मेलन के आयोजन और नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर सकारात्मक भाव भी सामने आया।
तुर्किये से आए पत्रकार दंपति यूनुस और फुल्या सोनर का अनुभव भी दिलचस्प रहा। दो दिनों तक BRICS सम्मेलन की रिपोर्टिंग करने के बाद उनके पास दिल्ली में केवल एक दिन था और उनकी पत्नी फुल्या ताजमहल देखने की इच्छुक थीं। यह प्रसंग बताता है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विदेशी पत्रकारों और प्रतिनिधियों के लिए केवल आधिकारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे मेजबान देश की संस्कृति और विरासत को समझने का अवसर भी बनते हैं।
दिल्ली बनी कूटनीति के साथ संस्कृति का केंद्र
BRICS 2026 प्रतिनिधिमंडलों के लिए दिल्ली के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी अनुभव का हिस्सा बनाया गया। कुछ विदेशी प्रतिनिधि अक्षरधाम पहुंचे तो कुछ ने दिल्ली के बाजारों और अन्य प्रमुख स्थलों का रुख किया। कई प्रतिनिधिमंडलों ने भारतीय खानपान और संस्कृति का भी अनुभव लिया।
यहां विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल अधिकारियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल की पसंद, सुरक्षा, समय-सारिणी और आधिकारिक कार्यक्रम के बीच संतुलन बनाना आसान काम नहीं होता। दिल्ली में होटल, परिवहन, सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता होती है।
मंच पर लीडर्स , पीछे टीम भारत
BRICS सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। अलग-अलग भू-राजनीतिक परिस्थितियों और मतभेदों के बीच सदस्य देशों को साझा एजेंडे पर लाना भारत की अध्यक्षता के लिए बड़ी परीक्षा थी।
इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक नेतृत्व के साथ भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों की भूमिका भी अहम रही। अलग-अलग देशों के साथ बातचीत, मसौदों पर विचार-विमर्श और साझा सहमति बनाने की प्रक्रिया पर्दे के पीछे चलती रही।
BRICS 2026 सम्मेलन की तस्वीरों में प्रधानमंत्री और विश्व नेताओं की मौजूदगी दिखाई दी, लेकिन उन तस्वीरों के पीछे विदेश मंत्रालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की वह टीम रही, जिसने महीनों की तैयारी को दो दिनों के सफल आयोजन में बदला।
BRICS 2026 ने एक बार फिर दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति केवल नेताओं की मेज पर नहीं होती। उसके पीछे प्रोटोकॉल, संवाद, समन्वय और लगातार काम करने वाली एक पूरी टीम होती है—और दिल्ली में इस ‘साइलेंट टीम’ ने भारत की मेजबानी को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से पेश किया।

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