आईजीएनसीए में हिन्दी पखवाड़ा की भव्य शुरुआत

नई दिल्ली, 16 सितंबर, बुधवार।इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में हिन्दी पखवाड़ा के आयोजनों का बुधवार को उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में शुभारंभ हुआ। केन्द्र के राजभाषा विभाग द्वारा 16 से 30 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम का उद्घाटन सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया। नीति आयोग की वरिष्ठ हिन्दी अनुवाद अधिकारी सुश्री तपोजा दत्ता और उनके सनूह ने मनमोहक ओडिसी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत हिन्दी के प्रयोग, लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
भाषा हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम
इस अवसर पर सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, हम सभी जानते हैं कि भाषाएं जो हैं, हमें सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करती हैं। हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम हैं, हमारे संप्रेषण का माध्यम है। इसलिए अगर हम हमारी भाषा को समृद्ध नहीं करेंगे तो निश्चित तौर पर हम धीरे धीरे एक बार फिर से बौद्धिक गुलामी की गिरफ्त में आते चले जाएंगे।उन्होंने आगे कहा, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में बहुत सारी बातें अब सहज होती चली जा रही हैं, अनुवाद भी बहुत सरल हो गया है। लोग कोई भी चीज़ अंग्रेजी से हिंदी में कुछ ही सेकेंड में करके रख देते हैं। यह भी अपने आप में बड़ी चिंता की बात है कि उसके लिए भी व्यक्ति को अब दिमाग लगाना नहीं पड़ता। कोई और दिमाग लगाता है, किसी और के दिमाग से हम काम करते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि हम उसमें सही-गलत का भी परीक्षण नहीं कर पाते। धीरे धीरे अगर यही प्रवृत्ति हमारे अंदर घर कर गई तो निश्चित तौर पर एक समय ऐसा आयेगा कि हम भाषा के सही प्रयोग को भूलते चले जाएंगे। वर्तनियां है, अनुस्वार है, कहां किस चीज का प्रयोग होना है, किस चीज की ध्वनि कैसे निकलती है, इन सब बातों के बारे में हमारी चेतना धीरे-धीरे शून्य होती चली जायेगी। और जब हमारी चेतना धीरे धीरे शून्य होती चली जायेगी। एक तरह से हम उसी यंत्र के समान हो जाएंगे, जिस यंत्र का प्रयोग हम आज कर रहे हैं। वह हमारे लिए बहुत घातक होगा।
सुश्री तपोजा दत्ता समूह द्वारा ओडिसी शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति
नीति आयोग की वरिष्ठ हिन्दी अनुवाद अधिकारी सुश्री तपोजा दत्ता एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत ओडिसी शास्त्रीय नृत्य रहा। शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, लय और सौंदर्यपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।17 सितंबर को हिन्दी कार्यशाला का आयोजन होगा।
18 सितंबर को संस्मरण लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 21 सितंबर को हिन्दी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता आयोजित होगी, जबकि 22 सितंबर को केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए देशभक्ति गीत, लोकगीत एवं गीतों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 23 सितंबर को सदस्य सचिव हिन्दी प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के अंतर्गत हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। 24 सितंबर को एम.टी.एस. वर्ग के कर्मचारियों के लिए हिन्दी श्रुतिलेख एवं सुलेख लेखन प्रतियोगिता का आयोजन होगा।
हिन्दी पखवाड़ा का समापन समारोह 30 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर सदस्य सचिव द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
आईजीएनसीए द्वारा आयोजित हिन्दी पखवाड़ा का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिन्दी के प्रति रचनात्मक अभिरुचि, साहित्यिक संवेदना और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करना है।

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