यह किताब संगीत साधकों की अनदेखी दुनिया को सामने लाती है

19 July, 2026, 3:22 pm

रोहित राय

आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे संगीत से प्रेम न हो। तनाव के क्षणों में संगीत मन को सुकून देता है, तो खुशियों के अवसर पर वही संगीत उत्साह और उल्लास को कई गुना बढ़ा देता है। संगीत आनंद की वह अनमोल धरोहर है, जिसके बिना कला का संसार अधूरा प्रतीत होता है। हाल ही में प्रकाशित पुस्तक "शब्द उठान सुर तिहाई" इसी संगीत-जगत का एक ऐसा सुंदर अध्याय है, जो पाठकों को सुरों, साधना और कलाकारों की अद्भुत दुनिया से परिचित कराती है।
यह पुस्तक केवल गीत, संगीत और गायन की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन गीतकारों, संगीतकारों और गायकों—यानी संगीत साधकों—के जीवन से जुड़े प्रेरक और रोचक प्रसंगों को भी सामने लाती है, जिन्होंने अपनी साधना, समर्पण और असाधारण प्रतिभा के बल पर भारतीय संगीत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
लेखक देव प्रकाश चौधरी ने इन संस्मरणों और घटनाओं को शब्दों की ऐसी सशक्त श्रृंखला में पिरोया है कि पाठक स्वयं को उन महफ़िलों, दरबारों और संगीत सभाओं का सहभागी महसूस करने लगता है। पुस्तक में गायिका गौहर जान, बेनज़ीर बाई, रविन्द्र जैन, आर. डी. बर्मन सहित अनेक महान कलाकारों और संगीत घरानों से जुड़े संस्मरण न केवल संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराते हैं, बल्कि बीते दौर की सांस्कृतिक छवि को भी जीवंत कर देते हैं।
यह पुस्तक संगीत प्रेमियों के लिए तो एक अनमोल सौगात है ही, साथ ही उन पाठकों के लिए भी प्रेरणादायी है जो किसी भी कला के पीछे छिपे संघर्ष, अनुशासन, साधना और समर्पण को समझना चाहते हैं। यह उन कहानियों का संसार है, जिनकी बदौलत भारतीय संगीत आज विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। सरल भाषा, सहज शैली और प्रेरक प्रसंग इस पुस्तक को अत्यंत पठनीय और संग्रहणीय बनाते हैं। साथ ही यह वर्तमान पीढ़ी को भारतीय संगीत की जड़ों और उसकी समृद्ध विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य भी करती है। इसके लिए लेखक विशेष रूप से साधुवाद के पात्र हैं।
"शब्द उठान सुर तिहाई" केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की गौरवशाली परंपरा, उसके महान कलाकारों और उनकी आजीवन साधना को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज़ है। यदि आप संगीत और साहित्य के इस अद्भुत संगम को महसूस करना चाहते हैं, तो यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।

लोकप्रिय