बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर जर्मनी में अंतरिम कानून की तैयारी

18 September, 2026, 8:21 am

सेलिन फ्रोनाफेल और मार्को राउख | डीपीए न्यूज़ एजेंसी

बर्लिन, 18 सितंबर। बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए जर्मनी अंतरिम कानून लाने की तैयारी कर रहा है। जर्मनी की शिक्षा मंत्री कारिन प्रीन ने सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र आधारित प्रतिबंधों का समर्थन करते हुए प्रभावी आयु सत्यापन, डिजिटल साक्षरता और अभिभावकों के लिए बेहतर जानकारी की जरूरत पर जोर दिया है।

प्रीन ने सार्वजनिक प्रसारक ZDF से कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंधों को लागू करने के लिए तकनीकी आयु सत्यापन जरूरी होगा। इसके लिए एक ऐप आधारित व्यवस्था विकसित की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयु सत्यापन की प्रक्रिया डेटा संरक्षण नियमों के अनुरूप होनी चाहिए और इसमें न्यूनतम व्यक्तिगत जानकारी ही एकत्र की जानी चाहिए। उनके मुताबिक आयु सत्यापन से जुड़ा डेटा ऑनलाइन प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।

प्रीन ने कहा कि नाबालिगों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनियों की होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोपीय संघ बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहा है।

 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन द्वारा बुधवार को सामने रखे गए प्रस्तावों के अनुसार, **13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को TikTok, Snapchat और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।

13 से 15 वर्ष की उम्र के किशोरों के लिए शुरुआत में केवल अभिभावकों की निगरानी और नियंत्रण वाले 'मिनी अकाउंट' की व्यवस्था प्रस्तावित है। इन अकाउंट के इस्तेमाल की सीमा प्रतिदिन एक घंटे तक रखने का प्रस्ताव है। स्वतंत्र सोशल मीडिया अकाउंट 15 वर्ष की उम्र के बाद उपलब्ध कराने की योजना है।

जर्मन शिक्षा मंत्री ने कहा कि उम्र आधारित प्रतिबंध अकेले पर्याप्त नहीं होंगे। इसके साथ मीडिया साक्षरता बढ़ाने और माता-पिता को बच्चों के डिजिटल व्यवहार के बारे में बेहतर जानकारी देने की जरूरत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में यह स्पष्ट मानक विकसित होना चाहिए कि तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम या डिजिटल सेवाओं तक पहुंच नहीं होनी चाहिए।

अक्टूबर में जर्मनी पेश करेगा अंतरिम कानून की रूपरेखा

यूरोपीय संघ के स्तर पर अंतिम नियम तैयार होने में समय लग सकता है। इसी को देखते हुए जर्मनी अपनी अंतरिम व्यवस्था तैयार कर रहा है। प्रीन ने कहा कि सरकार अक्टूबर में संक्रमणकालीन कानून के प्रमुख बिंदु पेश करेगी।

प्रस्ताव में नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े जर्मन कानूनों को और सख्त करने तथा आपराधिक कानून में मौजूद कमियों को दूर करने की योजना भी शामिल है। जर्मनी इस प्रक्रिया में यूरोपीय आयोग के साथ मिलकर काम करेगा।

EU की योजना केवल उम्र प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित डिजाइन अपनाने के लिए भी बाध्य करने का प्रस्ताव है। इनमें **अनंत स्क्रॉलिंग और वीडियो के अपने आप चलने जैसी सुविधाओं पर नियंत्रण, स्क्रीन टाइम की सीमा और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

 विशेषज्ञों ने किया समर्थन, लेकिन अमल पर सवाल

विशेषज्ञों ने यूरोपीय आयोग की पहल का व्यापक रूप से स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि इसकी सफलता नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

वियना विश्वविद्यालय की मनोरंजन शोधकर्ता कैथरीन कारसाय के अनुसार, केवल बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से समस्या की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। उनके मुताबिक इससे प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी का पहलू नजरअंदाज हो सकता है।

जर्मनी के ट्यूबिंगन यूनिवर्सिटी अस्पताल में समस्याग्रस्त इंटरनेट उपयोग पर शोध समूह की प्रमुख इसाबेल ब्रांडहॉर्स्ट ने कहा कि नए नियम बड़ी टेक कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म में बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि केवल अच्छे इरादे पर्याप्त नहीं हैं और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

उनके अनुसार, यदि बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर अधिक उम्र तक सोशल मीडिया से दूर रहना शुरू करते हैं, तो इससे भी महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। लेकिन यह आकलन करना अभी मुश्किल है कि निगरानी और अनुपालन की स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में प्रस्ताव कितना प्रभावी होगा।

 उम्र छिपाकर सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की चुनौती

विशेषज्ञों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि कुछ बच्चे प्रतिबंधों को दरकिनार करके सोशल मीडिया का इस्तेमाल जारी रखते हैं तो उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

जर्मनी के लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर मीडिया रिसर्च के कानूनी विशेषज्ञ स्टीफन ड्रेयर ने कहा कि प्रस्ताव बच्चों और किशोरों के साथ-साथ माता-पिता तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संचालकों के मौलिक अधिकारों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

उनके मुताबिक उम्र सत्यापन की अनिवार्यता का असर सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए संभावित प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान की ओर भी संकेत किया। स्थापित प्लेटफॉर्मों के पास पहले से बड़ा उपयोगकर्ता आधार है, जबकि नए प्लेटफॉर्मों को शुरुआत से ही अपने सभी उपयोगकर्ताओं की उम्र सत्यापित करनी पड़ सकती है।

इस तरह यूरोप में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की बहस अब केवल 'बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने' तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें प्लेटफॉर्म कंपनियों की जवाबदेही, अभिभावकीय नियंत्रण, डेटा गोपनीयता, आयु सत्यापन और बच्चों के मौलिक अधिकार—सभी को एक साथ संतुलित करने की चुनौती सामने है।

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