जर्मनी में भीषण गर्मी का कहर: इस साल अब तक लगभग 9,800 लोगों की मौत

Antje Kayser, dpa News Agency
बर्लिन, 31 जुलाई। जर्मनी में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी जानलेवा साबित हो रही है। देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान Robert Koch Institute (RKI) के अनुसार, इस वर्ष 19 जुलाई तक गर्मी से संबंधित कारणों से लगभग 9,800 लोगों की मौत होने का अनुमान है। यह आंकड़ा 2016 के बाद किसी भी पूरे वर्ष की तुलना में सबसे अधिक है।
आरकेआई की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, जून के दूसरे पखवाड़े में पड़े भीषण हीटवेव के दौरान अधिकांश मौतें हुईं। उस समय जर्मनी के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था और देश का राष्ट्रीय तापमान रिकॉर्ड भी टूट गया।
रिपोर्ट के मुताबिक 13 से 19 जुलाई के बीच ही गर्मी से जुड़े करीब 1,900 लोगों की मौत दर्ज की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि मौजूदा हीटवेव के दौरान गुरुवार को तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो इस दौर का सबसे गर्म दिन होगा।
सबसे अधिक प्रभावित बुजुर्ग आबादी रही है। गर्मी से हुई मौतों में 5,420 लोग 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे, जबकि 65 वर्ष से कम आयु के 630 लोगों की भी जान गई।
आरकेआई के अनुसार, कुछ मामलों में हीट स्ट्रोक सीधे मौत का कारण बना, लेकिन अधिकांश मामलों में अत्यधिक गर्मी और पहले से मौजूद बीमारियों के संयुक्त प्रभाव से लोगों की जान गई।
संस्थान ने बताया कि जिन सप्ताहों में औसत तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है, उनमें सामान्य गर्मियों की तुलना में मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है। यह विश्लेषण German Weather Service के 52 मौसम केंद्रों के आंकड़ों पर आधारित है। 13 से 19 जुलाई के सप्ताह में औसत तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गर्मी से बचाव पर तेज हुई बहस
जून के अंत में पड़ी भीषण गर्मी के बाद जर्मनी में हीट प्रोटेक्शन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। संसद में विपक्ष ने मांग की है कि भविष्य की हीटवेव से निपटने के लिए अस्पतालों, वृद्धाश्रमों और नर्सरी केंद्रों में बेहतर शीतलन (कूलिंग) व्यवस्था के लिए निवेश बढ़ाया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और देखभाल क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि देश की कई स्वास्थ्य एवं देखभाल सुविधाएं अभी भी भीषण गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं।


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