अहमदाबाद में ‘हाउस ऑफ मेमोरीज’: चार पीढ़ियों की कला का संगम बनी इंडिया आर्ट फेयर Edi+ions 2026
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अहमदाबाद। कला, स्मृति और मानवीय अनुभवों के मनोवैज्ञानिक संसार को केंद्र में रखते हुए India Art Fair Edi+ions 2026 का अहमदाबाद संस्करण 19 और 20 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। House of Memories’ शीर्षक वाली इस विशेष प्रस्तुति में एक ही गैलरी कार्यक्रम के तहत कला की चार पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व देखने को मिल रहा है।
अहमदाबाद के Baronet House में आयोजित इस कला आयोजन में Booth D पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कलाप्रेमियों के लिए प्रदर्शनी खुली है। प्रस्तुति में स्थापित और समकालीन कला जगत के कई महत्वपूर्ण कलाकारों की कृतियां शामिल की गई हैं। इस प्रदर्शनी में ए. रामचंद्रन, अनिता दुबे, अंजु डोडिया, आस्था बुटेल, अतुल डोडिया, बालकृष्ण दोशी, बेनोदेबिहारी मुखर्जी, एफ. एन. सूज़ा, फ़ैज़ा बट, गुरमिंदर सिकंद, हाइलोज़ोइक/डिज़ायर्स (हिमाली सिंह सोइन और डेविड सोइन टैपेसर), जय चौहान, जलदीप चौहान, जोया मुखर्जी लोग, प्रनीत सोई, रमेश्वर ब्रूटा, शैलेश बी. आर., शिल्पा गुप्ता, स्मिता एम. बाबू और सुधीर पटवर्धन की कृतियां शामिल हैं।
घर सिर्फ इमारत नहीं, स्मृतियों का संसार
‘House of Memories’ की अवधारणा फ्रांसीसी दार्शनिक गैस्टों बाशलार की प्रसिद्ध पुस्तक The Poetics of Spac (1958) में प्रस्तुत विचारों से प्रेरित है। बाशलार के अनुसार घर को केवल ईंट, दीवार, छत और वास्तु-रचना के रूप में नहीं देखा जा सकता। घर व्यक्ति की स्मृतियों, कल्पनाओं और भावनाओं को संजोने वाला एक मनोवैज्ञानिक संसार भी है।
इसी विचार को प्रदर्शनी की क्यूरेटोरियल दृष्टि में आगे बढ़ाया गया है। यहां घर को स्व की अभिव्यक्ति और मानवीय चेतना के प्रतीक के रूप में देखा गया है। प्रदर्शित कलाकृतियां केवल आकृतियों, परिदृश्यों या सांस्कृतिक जीवन के यथार्थ चित्रण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति के भावनात्मक और सामाजिक अनुभवों की गहरी परतों को सामने लाती हैं।
स्मृति, पहचान और अनुभवों की कलात्मक यात्रा
प्रदर्शनी में पेंटिंग, ड्रॉइंग और फोटोग्राफी के माध्यम से स्मृति और मानवीय अनुभव के अलग-अलग आयामों को प्रस्तुत किया गया है। क्यूरेशन को सैलून-शैली में तैयार किया गया है, जिसमें कलाकृतियों का संयोजन ऐसे किया गया है जैसे किसी घर में समय के साथ पारिवारिक वस्तुएं, स्मृतिचिह्न और अनुभव धीरे-धीरे जमा होते जाते हैं।
इस प्रस्तुति में अतीत और वर्तमान के बीच संवाद दिखाई देता है। अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों की कृतियां एक साथ रखकर यह सवाल भी उठाती हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके निजी अनुभवों, स्मृतियों और उस स्थान से किस तरह निर्मित होती है जिसे वह ‘घर’ कहता है।
‘House of Memories’ इस अर्थ में केवल कला-कृतियों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि स्मृति, स्थान, पहचान और मानवीय कल्पना के बीच संबंधों को देखने का एक कलात्मक अवसर प्रस्तुत करती है। अहमदाबाद में आयोजित यह प्रस्तुति स्थापित आधुनिक कलाकारों से लेकर समकालीन कला की नई आवाजों तक को एक साझा संवाद में लाती है।


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