शब्दों के जरिए सरहदों को जोड़ना

21 October, 2026, 2:15 pm

शब्दों के जरिए सरहदों को जोड़ना
लेखक  Priya Hajela  से बातचीत: इतिहास, सिख समुदाय और ब्रिटिश शासन के रिश्तों की पड़ताल

प्रश्न: इस पुस्तक की शुरुआत आपके लिए कहां से हुई?

उत्तर: इसकी शुरुआत लेडीज़ टेलर (Ladies’ Tailor) से हुई। लाहौर के सिख परिवारों के बैठकखानों और उनके जीवन पर शोध करते समय मुझे बार-बार ऐसी आवाजें सुनाई दीं, जो कहती थीं कि सब ठीक हो जाएगा। मेरे पात्र प्रीतम का मानना है कि अंग्रेज सिखों के मित्र हैं और उनकी रक्षा करेंगे। यहीं से मैंने इतिहास की कड़ियों को पीछे जाकर जोड़ना शुरू किया—एंग्लो-अफगान युद्धों से लेकर महाराजा रणजीत सिंह के अंग्रेजों के साथ शुरुआती संपर्कों तक।

प्रश्न: क्या आपने इस पुस्तक के लिए पारिवारिक कहानियों का सहारा लिया?

उत्तर: नहीं, इसकी कहानियां काल्पनिक हैं, लेकिन इनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर गहन शोध किया गया है। पुस्तक के कुछ प्रसंग ब्रिटिश अभिलेखागार से लिए गए हैं। इनमें एक ऐसी घटना भी शामिल है, जिसमें एक अधिकारी का शव वापस लाने के अभियान के दौरान भारतीय और ब्रिटिश सैनिकों की एक टुकड़ी को अपने सैनिक गंवाने पड़े थे।

बिएंत मेरी दादी का नाम था। वह हमें बहुत-सी कहानियां सुनाया करती थीं। उन कहानियों की स्मृतियां मेरे साथ रहीं, हालांकि पुस्तक की कथा काल्पनिक है।

प्रश्न: क्या आपने सिखों और अंग्रेजों के बीच वफादारी के रिश्ते को सरल रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया?

उत्तर:यही पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण और जटिल प्रश्न था। इसका कोई आसान जवाब नहीं था। एक स्रोत में सिखों और मुगलों के बीच ऐतिहासिक टकराव का उल्लेख था। इस संदर्भ में बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में हुए विद्रोह का भी जिक्र सामने आया। वहीं, एक अन्य स्रोत ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि एंग्लो-सिख युद्धों में ब्रिटिश सेना का हिस्सा रहे कुछ लोग बाद में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाली सेनाओं में भी शामिल हुए।

मैं यह दिखाना चाहता था कि उस दौर के लोगों के सामने परिस्थितियां कितनी जटिल थीं। उनके फैसलों को केवल वफादारी या विश्वासघात के दो खांचों में रखकर नहीं समझा जा सकता।

प्रश्न: पुस्तक का शीर्षक कहां से आया?

उत्तर: इसका संबंध रुडयार्ड किपलिंग की कविता द चिल्ड्रन्स सॉन्ग (The Children’s Song) से है। स्कूल की प्रार्थना सभा में हम यह कविता गाया करते थे। इसकी एक पंक्ति और उससे जुड़ा प्रसंग मेरी स्मृति में गहराई से दर्ज हो गया। युद्धों में अपने पिता खो चुके बच्चों के उस दृश्य ने मुझे भावुक कर दिया था।

हालांकि, पुस्तक का शीर्षक मुझे बाद में मिला। मैं यह समझना चाहता था कि क्या साहसिकता और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति पीढ़ियों से परिवारों में चली आती है। इस शीर्षक ने इतिहास की व्यापक कथा में एक व्यक्तिगत पहलू जोड़ दिया।

प्रश्न: क्या शोध के दौरान किसी ऐतिहासिक तथ्य ने पुस्तक के किसी दृश्य को बदलने के लिए आपको मजबूर किया?

उत्तर: हां। एक दृश्य में बिएंत अपने दादा की स्मृति ताजा करने के लिए चाय की ट्रे पर एक तस्वीर रखती है। बाद में मुझे एहसास हुआ कि विद्रोह के उस दौर में तस्वीर इतनी आसानी से उपलब्ध होना संभव नहीं था।

इसलिए मैंने उस प्रसंग में वास्तविक फोटोग्राफर थॉमस बिग्स को शामिल किया, जो बॉम्बे आर्टिलरी से जुड़े थे और हाल ही में सक्रिय सैन्य सेवा से मुक्त हुए थे। इस तरह शोध ने कहानी के एक दृश्य को अधिक ऐतिहासिक विश्वसनीयता देने में मदद की।

प्रश्न: आप किसे सबसे ज्यादा याद करते हैं?

उत्तर: सिंधु को। वह बेहद जीवंत और खुशमिजाज थी। मैं स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका को और विस्तार देना चाहता था। मेरा मानना है कि वह एक बेहद मुखर और विद्रोही तेवर वाली महिला होती।

प्रश्न: क्या लेडीज़ टेलर आपकी इस पुस्तक की तैयारी थी?

उत्तर: उसे एक तरह से इस पुस्तक तक पहुंचने का पड़ाव कहा जा सकता है, हालांकि जब मैं उसे लिख रहा था, तब मैंने इस बारे में नहीं सोचा था। मैं आगे ब्रिटिश और सिखों के संबंधों को समझना चाहता था, लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि इस विषय की ऐतिहासिक गहराइयों तक पहुंचने के लिए कितना व्यापक शोध करना पड़ेगा।

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