उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया प्रख्यात नृत्यांगना डॉ. आनंदा शंकर जयंत की संस्मरण पुस्तक ‘डांसिंग विद जॉय’ का विमोचन

15 October, 2026, 8:34 pm

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में प्रख्यात भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर, विदुषी और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. आनंदा शंकर जयंत की संस्मरण पुस्तक ‘डांसिंग विद जॉय’ का विमोचन किया। यह पुस्तक कला के प्रति समर्पण, व्यक्तिगत संघर्ष, आत्मबल और विपरीत परिस्थितियों में जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने की प्रेरणा देती है।

विमोचन समारोह में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी तथा उषालक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. पी. रघु राम सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में चिकित्सकों, कैंसर विशेषज्ञों और कैंसर से उबर चुके लोगों ने भी भाग लिया।

 ‘कैंसर मेरी जिंदगी का एक अध्याय था, पूरी कहानी नहीं’

अपनी पुस्तक के बारे में डॉ. आनंदा शंकर जयंत ने कहा कि कैंसर उनके जीवन का एक अध्याय था, लेकिन उनकी पूरी जिंदगी की कहानी नहीं। इस संघर्ष ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करना, अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानना और जीवन को अर्थ देने वाले जुनून से जुड़े रहना सिखाया।

उन्होंने कहा कि नृत्य उनके लिए हमेशा शक्ति, उपचार और आत्मबल का स्रोत रहा है। ‘डांसिंग विद जॉय’ के माध्यम से वह पाठकों को अपनी जीवन यात्रा स्वीकार करने, आंतरिक शक्ति पहचानने और चुनौतियों का साहस तथा विश्वास के साथ सामना करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।

डॉ. जयंत ने कहा कि संघर्ष हमारे व्यक्तित्व को आकार दे सकते हैं, लेकिन उन्हें हमारी पूरी पहचान निर्धारित नहीं करनी चाहिए। कठिनाइयों से उबरकर अपने प्रिय कार्यों को जारी रखना ही जीवन की वास्तविक पहचान है। 

जुनून, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का संदेश
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक केवल नृत्य और आनंद की कहानी नहीं है, बल्कि जुनून, कठिन परिश्रम, अनुशासन और अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे विकसित करने की शक्ति का भी संदेश देती है।

डॉ. जयंत की कैंसर से संघर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक कैंसर तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी के बावजूद जीवन को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, किसी कार्य के प्रति गहरा जुनून कठिन समय में व्यक्ति को संबल दे सकता है और चुनौतियों से लड़ने की शक्ति प्रदान कर सकता है।

पुस्तक के संदेश का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. आनंदा के लिए नृत्य यानी ‘डांसर’ के ‘डी’ ने कैंसर के ‘सी’ पर विजय पाने की प्रेरणा दी। वर्षों के अभ्यास, अनुशासन और समर्पण से विकसित उनकी नृत्य साधना ने उन्हें जीवन की बड़ी चुनौती का सामना करने में मदद की।

 कैंसर की रोकथाम और समय पर जांच पर जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता और बीमारियों की शुरुआती पहचान को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि मरीजों को अपने घर के नजदीक विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध हो सके। उनके संबोधन के अनुसार, 700 से अधिक जिला क्लीनिक और 500 डे केयर कैंसर केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 19 राज्य कैंसर संस्थानों और 20 तृतीयक देखभाल कैंसर केंद्रों को संचालन के लिए मंजूरी दी गई है।

उपराष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवरेज और फरवरी 2026 में शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य लगभग 1.2 करोड़ किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका उपलब्ध कराना है और अब तक 50 लाख से अधिक किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है।

उन्होंने कैंसर के प्रति जागरूकता, शुरुआती जांच और समय पर उपचार को जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

 परिवार और देखभाल करने वालों की भूमिका अहम

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए परिवार और स्वयंसेवकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। परिवार कठिन समय में मरीजों को भावनात्मक संबल, देखभाल और प्रोत्साहन देते हैं। इस दौरान वे कई बार व्यक्तिगत और आर्थिक स्तर पर भी बड़े त्याग करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिभा को उत्कृष्टता में बदलने के लिए निरंतर सीखना, अभ्यास और समर्पण जरूरी है। जीवन में विकसित किए गए कौशल और अनुशासन अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने में भी सहायक साबित हो सकते हैं।

डॉ. आनंदा शंकर जयंत को पुस्तक के विमोचन पर बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि ‘डांसिंग विद जॉय’ युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही, यह पुस्तक लोगों को जीवन की चुनौतियों का सामना साहस, सहजता और प्रसन्नता के साथ करने का संदेश देगी।

 उपचार करने वाले चिकित्सक ने भी की पुस्तक की सराहना

उषालक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष और डॉ. जयंत के उपचार करने वाले सर्जन डॉ. पी. रघु राम ने उनकी जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए पुस्तक की सराहना की।

उन्होंने कहा कि डॉ. आनंदा की यात्रा में उन्होंने केवल कैंसर से जूझ रहे एक मरीज को नहीं देखा, बल्कि ऐसी कलाकार को देखा जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपने उद्देश्य और प्रेरणा में बदल दिया। उनके अनुसार, डॉ. जयंत ने स्वयं को संभालने के साथ-साथ अपनी यात्रा से अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है।

समारोह में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। चिकित्सकों, कैंसर विशेषज्ञों और कैंसर से उबर चुके लोगों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया।

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