राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह का आमंत्रण

21 October, 2026, 11:08 pm

 

नई दिल्ली, 21  : नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के भव्य पर्व के शुभारंभ के प्रतीक के रूप में 31 अक्टूबर को आयोजित ध्वजारोहण समारोह का आमंत्रण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के साथ राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री एवं अधिकारी-पदाधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति भवन में हुई इस भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को आगामी 31 अक्टूबर को नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले ध्वजारोहण समारोह का औपचारिक निमंत्रण दिया। इसके साथ ही, उन्हें महाराष्ट्र की आध्यात्मिक परंपरा से लेकर आदिवासी उद्यमिता, वस्त्रकला, कृषिसमृद्धि और खाद्य संस्कृति तक की विविधतापूर्ण विरासत से परिचित कराने वाला एक विशेष उपहार सेट भी प्रदान किया। राष्ट्रपति को ध्वजारोहण के दिन ही आयोजित होने वाली गोदा आरती, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की वेबसाइट के उद्घाटन, कुंभ मेला गीत के लोकार्पण, कुंभ मेले पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा कुंभ मेले के डाक टिकट के अनावरण के लिए भी आमंत्रित किया गया।

इस अवसर पर अन्न एवं नागरिक आपूर्ति तथा ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबल, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन एवं कुंभ मेला मंत्री तथा नाशिक जिले के पालकमंत्री गिरीश महाजन, स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, अन्न एवं औषधि प्रशासन तथा विशेष सहायता मंत्री नरहरि झिरवाल, नाशिक की महापौर हिमगौरी आडके-आहेर, त्र्यंबक नगर परिषद की नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार, त्र्यंबकेश्वर देवस्थान के अध्यक्ष तथा धर्मादाय सहआयुक्त न्यायमूर्ति विवेक सोनुणे, नाशिक पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी, त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे, रामतीर्थ गोदावरी सेवा समिति के नरसिंहकृपा दास, सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम और कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कुंभ मेला : महाराष्ट्र की संस्कृति को दर्शाने वाला अनोखा आमंत्रण

राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया गया यह आमंत्रण एक विशिष्ट कलात्मक संकल्पना पर आधारित है। निमंत्रण बॉक्स खुलते ही कुंभ मेले की पौराणिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक महात्म्य और भव्यता को दर्शाने वाली त्रिविमीय (पॉप-अप) कलाकृति उभरती है। दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद और स्पर्श—इन पंचेंद्रियों से जुड़े अनुभवों को समेटे इस संकल्पना के माध्यम से नाशिक की सांस्कृतिक विरासत, पवित्र गोदावरी की महिमा और भारतीय परंपरा में कुंभ मेले के असाधारण महत्व को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया है।

इस उपहार सेट में आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत ‘शबरी नेचुरल्स’ के उत्पादों को शामिल किया गया है। अगरबत्ती, मोटे अनाजों से तैयार खाद्य पदार्थ, महुआ के फूलों से बने उत्पाद, बांस से बनी वस्तुएं और वन शहद जैसे विभिन्न उत्पादों के माध्यम से आदिवासी समाज के पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग और स्थानीय उद्यमिता की क्षमता को सामने लाया गया है। इसके जरिए आदिवासी कारीगरों के कौशल, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों और समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण का संदेश भी दिया गया है।

महाराष्ट्र की वस्त्र परंपरा का प्रतीक मानी जाने वाली येवला की पैठणी को इस सेट में स्थान दिया गया है। नाशिक की कृषिसमृद्धि का प्रतिनिधित्व काली किशमिश और काजू द्वारा किया गया है, जबकि नाशिक की प्रसिद्ध खाद्य परंपरा के प्रतीक चिवड़े को भी इस उपहार सेट में शामिल किया गया है। इसके साथ ही, कुछ चुनिंदा मिठाइयां और सूखे मेवे भी इस सेट का हिस्सा हैं।

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