जर्मन राष्ट्रपति ने चीन से व्यापार घाटा कम करने का किया आग्रह, द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में संतुलन पर जोर

जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने की अपील की है। चीन की चार दिवसीय राजकीय यात्रा के अंतिम दिन शुक्रवार को बीजिंग में हुई मुलाकात के दौरान स्टाइनमायर ने कहा कि जर्मनी और चीन के बीच व्यापारिक एवं आर्थिक संबंध मजबूत होने चाहिए, लेकिन इनका लाभ दोनों देशों को समान रूप से मिलना भी जरूरी है।
स्टाइनमायर ने पिछले वर्ष जर्मनी के साथ चीन के करीब 90 अरब यूरो (लगभग 100 अरब डॉलर) के व्यापार घाटे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध तेजी से विकसित हो रहे हैं और ऐसे में व्यापार के लिए निर्धारित परिस्थितियों की समय-समय पर समीक्षा करना स्वाभाविक है।
इससे पहले चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग के साथ बैठक में भी स्टाइनमायर ने व्यापारिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का भरोसा जताया था। उन्होंने यूरोपीय संघ को हाइब्रिड कारों के निर्यात पर हाल में हुए समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि मुश्किल मुद्दों पर भी बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है।
जर्मन राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनका देश चीन के साथ आर्थिक संबंधों को बनाए रखने और मजबूत करने का इच्छुक है। चीन जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। उन्होंने चीन की तकनीकी और आर्थिक प्रगति की भी सराहना की।
वैश्विक व्यवस्था में चीन की जिम्मेदारी पर जोर
शी जिनपिंग के साथ बातचीत में स्टाइनमायर ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चीन की आर्थिक ताकत, तकनीकी क्षमता और राजनीतिक प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, कानून के शासन और वैश्विक नियमों को बनाए रखने में योगदान दें।
उन्होंने चिंता जताई कि दुनिया के कई हिस्सों में नियमों का उल्लंघन हो रहा है और ताकतवर देशों का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर हावी होता दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व, सूडान और यूक्रेन में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चीन से वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
स्टाइनमायर ने कहा कि दुनिया को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और उसके मूल सिद्धांतों के संरक्षण के लिए चीन की प्रतिबद्धता की जरूरत है।
गौरतलब है कि जर्मनी में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक प्रकृति का है, लेकिन स्टाइनमायर अंतरराष्ट्रीय मामलों और विदेश नीति पर अक्सर अपनी राय रखते रहे हैं। चीन यात्रा के दौरान उनका संदेश स्पष्ट रहा कि जर्मनी चीन के साथ आर्थिक सहयोग चाहता है, लेकिन यह सहयोग व्यापारिक संतुलन और साझा वैश्विक जिम्मेदारियों पर आधारित होना चाहिए।
DPA (जर्मन प्रेस एजेंसी)




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