8-दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 जारी

गुवाहटी - 23 अक्टूबर 2026। असम की राजधानी गुवाहाटी में 8-दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 आयोजित किया जा रहा है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह मेला बुधवार, 28 अक्टूबर तक चलेगा।मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुवाहाटी के खानापारा स्थित फार्म गेट पर यह मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि आगंतुक पारंपरिक उत्पादों की विविधतापूर्ण श्रृंखला को देखने, कारीगरों की कलाकृतियां खरीदने और उनका सहयोग करने में रुचि ले रहे हैं।उन्होंने कहा कि यह मेला पूर्वोत्तर राज्यों सहित देशभर के कारीगरों को एक मंच पर ला रहा है, ताकि वे पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की भारत की समृद्ध एवं विविधतापूर्ण विरासत को प्रदर्शित कर सकें।
अधिकारी ने बताया कि मेले में 31 महिला कारीगरों सहित कुल 75 कारीगर भाग ले रहे हैं, जो हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि यह आयोजन भाग लेने वाले कारीगरों को आगंतुकों के समक्ष अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उन्हें सीधे बेचने, संभावित ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने तथा अपने बाज़ार का विस्तार करने के अवसर तलाशने के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है।उन्होंने आगे कहा कि कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देकर यह मेला बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और भाग लेने वाले कारीगरों के लिए आजीविका के नए अवसरों को बेहतर बनाने का प्रयास करता है।अधिकारी ने बताया कि गुवाहाटी में आयोजित इस मेले में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला और हथकरघा उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है।उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों की देश के अन्य हिस्सों के कारीगरों के साथ भागीदारी से आगंतुकों को भारत की कलात्मक परंपराओं, स्वदेशी शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत की विविधता को समझने और सराहने का अवसर मिलेगा
।उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य उन कारीगरों के कौशल और रचनात्मकता के प्रति अधिक सराहना को बढ़ावा देना भी है, जिनका कार्य पारंपरिक ज्ञान और शिल्पकलाओं को संरक्षित रखने में योगदान देता है।अधिकारी ने आगे बताया कि मेले का एक प्रमुख उद्देश्य भारत-ट्यूलिप(पारंपरिक कारीगर उत्थान आजीविका कार्यक्रम) को बढ़ावा देना है। यह एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य लक्षित समूहों से संबंधित कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन को भौतिक बिक्री केंद्रों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुगम बनाना है।व्यापक बाज़ारों और डिजिटल माध्यमों तक पहुंच को बढ़ावा देकर इस पहल का उद्देश्य बाज़ार से जुड़ाव को सुदृढ़ करना, ग्राहकों तक पहुंच का विस्तार करना और कारीगरों की आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त अवसर सृजित करना है।उन्होंने कहा कि यह पहल कारीगरों और उनके उत्पादों को बदलते उपभोक्ता बाजारों से जोड़कर पारंपरिक कला एवं शिल्प के संरक्षण और संवर्धन में भी सहयोग करती है।
सरस शिल्प समागम मेला(एसएसएम-2026) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को विपणन सहायता प्रदान करना है। ये तीन निगम हैं: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम(एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम(एनएसकेएफडीसी) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम(एनबीसीएफडीसी)।एसएसएम 2026 का पहला संस्करण 19 अक्टूबर को कर्नाटक के मैसूरु में संपन्न हुआ, जिसमें कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित 9 दिवसीय मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत से प्रेरित होकर यह मेला अनुसूचित जातियों(एससी), अन्य पिछड़ा वर्गों(ओबीसी), सफाई मित्रों और विमुक्त जनजातियों(डीएनटी) के कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
यह मेला इन समुदायों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने, अपने उत्पादों के विपणन और टिकाऊ आजीविका के अवसरों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान कर रहा है।अधिकारी ने बताया कि यह पहल वित्तीय और विकासात्मक सहायता के साथ-साथ बाज़ारोन्मुखी उपायों को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे कारीगर अपने पारंपरिक कौशल और शिल्पकला को आजीविका के व्यवहार्य अवसरों में बदल सकें।
यह उल्लेखनीय है कि शिल्प समागम मेले जैसी पहलों के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, बाजार तक पहुंच सुगम बनाने और टिकाऊ आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
यह मेला भाग लेने वाले कारीगरों को व्यापक पहचान दिलाने, उनके उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भारत की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प परंपराओं के साथ आम जनता की भागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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