दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी द्वारा समुह स्त्री सतसंत सभाओं का विशेष समागम

31 October, 2026, 6:00 pm

 

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी की संपूर्णता को मुख्य रखते हुए दिल्ली की समूह सिंह सभाओं के स्त्री सत्संग जत्थों के सहयोग से एक विशाल गुरमत समागम का आयोजन गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब परिसर स्थित भाई लक्खी शाह वणजारा हॉल में किया गया। जिसमें दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, महासचि जगदीप सिंह काहलो ने विशेष तौर पर पहुंचकर संगत को सम्बोधन करते हुए गुरु तेग बहादुर जी के शहादत के इतिहास को घर घर तक पहुंचाने की बात कही।

इस धार्मिक समागम में दिल्ली की विभिन्न स्त्री सत्संग सभाओं की महिलाओं ने बड़ी संख्या में एक ही रंग के सूट पहनकर भाग लिया। समागम के दौरान संगत को संबोधित करते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलो ने कहा कि दिल्ली की संगतें सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी मनाने का अवसर प्राप्त हुआ और उम्मीद की जाती है कि अब शहीदी शताब्दी को संगत उसी श्रृद्धा भावना के साथ मनाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष दिल्ली की संगतों ने गुरु साहिब की महान शहादत को समर्पित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर उनकी अद्वितीय कुर्बानी को याद किया।

सरदार कालका और सरदार काहलो ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने केवल एक धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश नहीं दिया, बल्कि देश की धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति, विरासत और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शहादत ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में गुरु साहिब की शहादत का ऐतिहासिक योगदान है। गुरु साहिब ने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय अपना बलिदान देकर मानवता के इतिहास में एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी।

 

उन्हांेने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गुरु साहिब के जीवन, उनकी शिक्षाओं और महान शहादत के संदेश को घर-घर तक पहुंचाना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की समूह स्त्री सत्संग सभाएं गुरबाणी के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को सिख इतिहास तथा गुरसिखी जीवन पद्धति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने इस धार्मिक समागम के आयोजन में योगदान देने वाली सभी स्त्री सत्संग सभाओं और सेवादारों की सराहना की। समागम के दौरान स्त्री सत्संग सभाओं की ओर से गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से गुरु साहिब की महान शहादत को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। संगतों ने गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने, गुरबाणी से जुड़े रहने और गुरसिखी जीवन पद्धति को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के साथ शहादत देने वाले भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की महान कुर्बानियों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।

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