भारतीय संस्कृति विश्व कल्याण का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य विचारधारा : सुधीर मुनगंटीवार

31 October, 2026, 10:14 pm

 

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा है कि भारतीय संस्कृति केवल देश की ऐतिहासिक विरासत नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, मानवता, संस्कार और विश्व कल्याण का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य विचारधारा है। हजारों वर्षों की तपस्या और ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा से विकसित इस संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में गायत्री परिवार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

नई दिल्ली में वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी और अखंड ज्योति के अवतरण के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन्मशताब्दी त्रिवेणी पर्व को संबोधित करते हुए मुनगंटीवार ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल महान विभूतियों के स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की चेतना को जागृत करने और आध्यात्मिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प है।

कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या, विश्व हिंदू परिषद के महासचिव स्वामी विज्ञानानंद, रामकृष्ण मिशन के प्रमुख स्वामी सर्वलोकानंद और उत्तर प्रदेश के विधायक राजेश्वर सिंह सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मुनगंटीवार ने कहा कि संतों और महापुरुषों की विचारधारा से समृद्ध महाराष्ट्र की भूमि से दिल्ली आकर गायत्री परिवार के इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के सान्निध्य में उन्हें हजारों ऊर्जा केंद्रों से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा जैसा अनुभव हुआ। इसके लिए उन्होंने डॉ. चिन्मय पंड्या का आभार व्यक्त किया।

 मानवता की सेवा ही सर्वोच्च पूजा

माता भगवती देवी शर्मा और पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान का उल्लेख करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि इन महान विभूतियों ने समाज को केवल आध्यात्मिक दिशा ही नहीं दी, बल्कि लोगों के विचार और जीवन बदलने का कार्य भी किया है। उनकी विचारधारा गंगा की उस धारा की तरह है, जो प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन को पवित्र और प्रेरित करती है।

गायत्री परिवार के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिरों में पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। जरूरतमंदों की सहायता करना, मानवता की सेवा करना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना ही सच्ची पूजा है। गायत्री परिवार ने मानवता को सर्वोच्च धर्म मानकर समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक चेतना का संचार करने वाला मंत्र है। भारतीय संस्कृति की यही आध्यात्मिक शक्ति उसे विश्व की अन्य सभ्यताओं के बीच विशिष्ट पहचान दिलाती है।

 भारत में जन्म लेना हजारों जन्मों का पुण्य

भारत के प्रति अपने राष्ट्राभिमान को व्यक्त करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि दुनिया का सबसे सुंदर और समृद्ध देश भारत है। इस पवित्र भूमि पर जन्म लेना हजारों जन्मों की पुण्याई का परिणाम है। यदि दोबारा जन्म लेने का अवसर मिले तो वह भारतभूमि में ही जन्म लेना चाहेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल आर्थिक और भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बनाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

 शरीर के साथ मन का स्वास्थ्य भी जरूरी

डॉ. चिन्मय पंड्या के योगदान की सराहना करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनके पास अस्पताल स्थापित कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा योगदान देने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने समाज के मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए स्वयं को समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर का स्वस्थ रहना आवश्यक है, उसी प्रकार मन का स्वस्थ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डॉ. पंड्या का कार्य समाज को इसी दिशा में प्रेरित कर रहा है।

अपने संबोधन के अंत में मुनगंटीवार ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सूर्य और चंद्रमा के अस्तित्व तक भारतीय संस्कृति का गौरव और उसका प्रकाश बना रहेगा, लेकिन इस महान परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रत्येक भारतीय को अपने आचरण और कर्मों से योगदान देना होगा।

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