शिल्प समागम मेला 2026 में पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के दिल्ली हाट, आईएनए में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 में भारत की समृद्ध कला परंपराओं, पारंपरिक शिल्पकला और सांस्कृतिक विविधता को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कला रूपों के प्रदर्शन के साथ-साथ यह 15 दिवसीय मेला भारत की समावेशी भागीदारी और विविधता का जीवंत उत्सव भी बनकर उभर रहा है।
‘प्रकाश और परंपरा – ज्योति से ज्योति जलाएँ’ विषय पर आयोजित यह मेला भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, उत्सव की रोशनी और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाता है।
इस मेले को सात अलग-अलग थीम वाले ज़ोन में बांटा गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र भारत की कला, शिल्प, परंपराओं, खानपान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अनूठा अनुभव प्रदान करता है। कला आँगन में शिल्पकारों द्वारा अपनी कला का सजीव प्रदर्शन किया जाता है; प्रकाश चौक में दीपों और रोशनी की विविध छटाएँ देखने को मिलती हैं; पूजा पथ में पूजा-पाठ से जुड़ी वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं; सजावट बाज़ार में घर की सजावट से जुड़े उत्पाद उपलब्ध हैं; घराना में वस्त्रों और फैशन से जुड़े उत्पादों को स्थान दिया गया है; स्वाद चौक में विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है; जबकि मंच पर सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।
मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। अब तक आयोजित 15 ऐसे मेलों के माध्यम से अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों के 1,000 से अधिक कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसरों का लाभ मिला है।
यह मेला पारंपरिक शिल्पकला, हथकरघा उत्पादों, शिल्प के लाइव प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक मंच पर लाने के साथ-साथ उद्यमशीलता, आजीविका के अवसरों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है।
मेले में 130 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और दिव्यांगजनों से जुड़े कारीगरों एवं लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण भारत ट्यूलिप (Bharat TULIP) है, जिसका उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारीगरों को व्यापक बाजारों से जोड़ना है, ताकि वे अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंच सकें और अपनी आर्थिक संभावनाओं को मजबूत बना सकें। यह पहल कारीगरों को बेहतर पहचान और उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराकर भारत की पारंपरिक कला एवं शिल्पकलाओं के संरक्षण में भी योगदान देती है।
पर्पल फेस्ट के माध्यम से यह मेला दिव्यांगजनों की रचनात्मकता, क्षमताओं और योगदान को भी प्रोत्साहित करता है। इसके जरिए समाज में समान अवसरों, सक्रिय भागीदारी और समावेशिता को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाता है।
इनपुट -पीआईबी

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