गन्ना 600 रुपये नहीं तो मुख्यमंत्री आवास पर बैठेगी किसान पंचायत: रतन मान
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नई दिल्ली,6 नवंबर 2026।गन्ने से बनने वाली तमाम चीजें महंगी और किसानों का गन्ना सस्ता है। सरकार ने गन्ना किसानों के साथ खुला विश्वासघात किया है। गन्ने के भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करवाने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में मंगलोरा गांव में गन्ना किसानों की महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत की अध्यक्षता युवा किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने की। महापंचायत में किसान नेता सुरेश कोथ, किसान नेता जोगिंदर नैन, कामरेड सुमित सहित कई प्रमुख किसान नेताओं ने शिरकत की।
गन्ने के रेट की बढ़ोतरी के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय
महापंचायत में सर्वसम्मति से गन्ने के रेट की बढ़ोतरी के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत शुगर मिलों में पंचायत करते हुए 2 दिसंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सैनी के आवास का घेराव किया जाएगा।संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने बताया कि गन्ना किसानों की राज्य स्तरीय पंचायत हुई, जिसमें गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर आंदोलन की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार अगर किसानों की मांग नहीं मानती तो किसान आंदोलन को और तेज करने को मजबूर होंगे।
रतन मान ने कहा कि गन्ना किसानों को लागत का पूरा भाव न मिलने से किसान भारी घाटा वहन करने को मजबूर है। गन्ने से मिलने वाली चीनी, इथेनॉल उद्योग तो मुनाफा कमा रहे हैं और गन्ना पैदा करने वाला किसान घाटे में है। गन्ना तो 4 रुपये 15 पैसे प्रति किलो है, जबकि चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी नीति के चलते किसान गन्ने की खेती छोड़ने पर मजबूर है।उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की सालभर की मुख्य फसल है, जिसमें वर्तमान रेट में किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। केंद्र सरकार भी लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जो सहकारी शुगर मिलों के खिलाफ हैं। सरकार द्वारा किसानों की मांगों के अनुरूप भाव न देने से किसानों में भारी आक्रोश है।
सरकार सिर्फ आश्वासन देती है अमल ही करती
रतन मान ने कहा कि सरकार हर बार किसानों को आश्वासन देकर टाल देती है, लेकिन इस बार किसान आश्वासन से नहीं मानेंगे। किसान को उसका हक चाहिए। गन्ने की खेती में खाद, बीज, दवाई, डीजल, मजदूरी और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। एक एकड़ गन्ने की खेती पर किसान का 80 से 90 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है, जबकि सरकार जो भाव दे रही है उसमें किसान की लागत भी पूरी नहीं हो रही। ऊपर से शुगर मिलें समय पर भुगतान नहीं करतीं, जिससे किसान को कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि किसानों की आमदनी दोगुनी करेंगे, लेकिन जमीन पर हालात उल्टे हैं। गन्ने का भाव पिछले कई सालों से मामूली बढ़ाया जा रहा है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ गई है। चीनी मिलें चीनी के साथ-साथ शीरा, खोई, इथेनॉल और बिजली बेचकर करोड़ों रुपये कमा रही हैं, लेकिन किसान को उसका हिस्सा नहीं दिया जा रहा। यह सरासर अन्याय है।
आंदोलन होगा
महापंचायत में किसानों ने तय किया कि या तो सरकार रेट बढ़ोतरी की घोषणा करे, अन्यथा किसान आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे, जिसकी शुरुआत मिलों में पंचायत से की जाएगी और जरूरत पड़ी तो मिल गेटों पर तालाबंदी भी करेंगे।
किसान सबसे मेहनती
किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि हरियाणा का गन्ना किसान पूरे देश में सबसे मेहनती है। वह दिन-रात खेत में मेहनत करके गन्ना पैदा करता है, लेकिन सरकार उसकी मेहनत का मोल नहीं समझ रही। उन्होंने कहा कि जब तक 600 रुपये का भाव नहीं मिलेगा, तब तक किसान पीछे नहीं हटेगा। यह लड़ाई सिर्फ गन्ने के भाव की नहीं, बल्कि किसान के स्वाभिमान की लड़ाई है।
किसान गन्ना फसल को उगाना छोड़ देगा
किसान नेता जोगिंदर नैन ने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि अगर किसान गन्ना बोना छोड़ देगा तो शुगर मिलें किससे चलेंगी। मिलों के कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर, मजदूर सबका रोजगार गन्ने से ही चलता है। गन्ना किसान को मारना मतलब पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मारना है। इसलिए सरकार को तुरंत 600 रुपये भाव की घोषणा करनी चाहिए।
किसान जाग चुके
युवा किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने कहा कि युवा किसान अब जाग चुका है। वह अपने हक के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है। मंगलोरा गांव से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे हरियाणा में फैलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं समझना चाहिए कि किसान थक गया है। किसान ने पहले भी बड़े-बड़े आंदोलन जीते हैं और इस बार भी जीतेगा।मंच का संचालन बीकेयू के प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बांटने की कोशिश कर रही है, लेकिन किसान एकजुट हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सभी संगठन एक साथ हैं।
इन शुगर मिलों पर पहले चरण में होंगे प्रदर्शन
आंदोलन के पहले चरण में प्रदेश की 7 प्रमुख शुगर मिलों पर प्रदर्शन किया जाएगा। सोनीपत शुगर मिल पर 12 नवंबर, करनाल शुगर मिल पर 14 नवंबर, यमुनानगर पर 16 नवंबर, नारायणगढ़ शुगर मिल पर 18 नवंबर, जींद शुगर मिल पर 21 नवंबर, रोहतक शुगर मिल पर 23 नवंबर और भादसौ शुगर मिल पर 27 नवंबर को किसान पंचायत व ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी।रतन मान ने बताया कि इन सभी मिलों पर किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ पहुंचेंगे और मिल प्रबंधन को ज्ञापन देंगे। मिलों पर पंचायत करके किसानों को आंदोलन के लिए जागरूक किया जाएगा। अगर इसके बाद भी सरकार ने भाव नहीं बढ़ाया तो 2 दिसंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा और वहीं पर किसान पंचायत बैठेगी।
शांतिपूर्ण होगा आंदोलन
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार ने अगर किसानों को रोकने की कोशिश की तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। किसान अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि 600 रुपये से कम भाव मंजूर नहीं है। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर समय रहते भाव की घोषणा नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा और प्रदेश की सभी शुगर मिलों का काम ठप कर दिया जाएगा।
अंत में रतन मान ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हरियाणा किसानों के साथ खड़ी है। गन्ना किसान अकेला नहीं है। पूरा किसान समाज उसके साथ है। सरकार को जल्द से जल्द गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना चाहिए, नहीं तो किसान मुख्यमंत्री आवास पर बैठकर अपना हक लेकर ही उठेंगे।
महापंचायत में ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर जगदीप एक्स सरपंच मंगलोरा, जगबीर सिंह मंगलोरा, फतेह सिंह मंगलोरा, ओमपाल कादियान अंधेड़ा, मदन नंबरदार अंधेड़ा, श्याम सिंह चौहान डाकवां गुजरात, सतबीर कादियान अंधेड़ा, उदय सिंह राणा, उम्मेद सिंह राणा, अनुज नंबरदार लालूपुरा, अक्षय मास्टर लालूपुरा, राम मेहर करसोला, विश्वास लालूपुरा, सुभाष मंगलोरा, सुभाष शर्मा मंगलोरा, पार इनाम खान जड़ोली, नरेश खट्टर जड़ोली मुख्य रूप से मौजूद रहे ।

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