सेमीकॉन 2.0 के अंतर्गत दूसरे, तीसरे और चौथे स्तंभ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

7 November, 2026, 1:06 pm

नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026 ।  इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी, रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा अब केवल पुर्जों को जोड़ने के चरण से आगे बढ़कर एक व्यापक घरेलू मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में बढ़ गई है। इसमें मॉड्यूल, कलपुर्जे, सामग्री और उन्नत तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने बैटरी सेल, कॉपर फॉयल, कॉपर-क्लैड लैमिनेट और हाई-एंड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड के क्षेत्र में बढ़ती क्षमताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि सरकारी पहल से घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत हो रही हैं तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं, क्योंकि इस योजना के तहत स्वीकृत इकाइयों में से लगभग 50 प्रतिशत एमएसएमई क्षेत्र से जुड़ी हैं।

सेमीकॉन इंडिया 2.0 का मुख्य फोकस एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेमीकॉन इंडिया 2.0 का मुख्य फोकस एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करने पर होगा, जिसमें विशेष रूप से उपकरण, सामग्री, रसायन और गैसें शामिल हैं। इसका लक्ष्य कम से कम तीन प्रमुख उपकरण निर्माताओं और पांच रसायन व गैस कंपनियों को भारत में लाना है। उन्होंने परियोजनाओं के चयन की कठोर प्रक्रिया का आह्वान करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप, देश के सेमीकंडक्टर लक्ष्यों को तय करने में गुणवत्ता, तकनीकी मजबूती, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने उद्योग के हितधारकों से सहयोग करने, विशेषज्ञता साझा करने और भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर सुधार करने का भी आग्रह किया।

पहले घोषित 69,548 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े 106 आवेदनों की मंजूरी को जारी रखते हुए, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 7,503 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत 12 और आवेदनों को मंजूरी दे दी है।वर्तमान में दी गई मंजूरियों में 39,045 करोड़ रुपये के उत्पादन का अनुमान है और इससे 7,127 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

वर्तमान में दी गई मंजूरियों में 10 लक्षित सेगमेंट के उत्पादों का विनिर्माण शामिल है, जिनमें बेयर कंपोनेंट्स, आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद और कैपिटल गुड्स शामिल हैं। इनमें निम्नलिखित हैं: कंपोनेंट: मल्टी-लेयर पीसीबी, रिले, हीट सिंक और विशेष सिरेमिक;आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद: कॉपर फॉइल, एनोड मैटेरियल, कैथोड एक्टिव मैटेरियल,पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म और कैमरा रिम; औरकैपिटल गुड्स और उनके कलपुर्जे।
ये स्वीकृत परियोजनाएं गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के 7 राज्यों में हैं, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का भौगोलिक दायरा और बढ़ गया है।

वर्तमान स्वीकृतियों में कॉपर फॉयल, कैथोड एक्टिव मैटेरियल और स्पेशलिटी सिरेमिक्स के लिए ईसीएमएस के अंतर्गत पहली बार अनुमोदन शामिल हैं, जिससे घरेलू स्तर पर ही निर्मित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और अपस्ट्रीम मैटेरियल का दायरा और विस्तृत होता है।


इसके अलावा, वर्तमान मंजूरियों में कैपिटल गुड्स और उनके कलपुर्जों के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है। इनमें टीडीकॉनेक्स (चेन्नई) प्राइवेट लिमिटेड को प्रिसिजन मोल्ड और टूलिंग के लिए; रॉकवेल ऑटोमेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कैपिटल इक्विपमेंट हेतु पावर और कंट्रोल सिस्टम के लिए; और विप्रो परी रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को फैक्ट्री ऑटोमेशन और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़े कैपिटल इक्विपमेंट के लिए मंजूरी दी गई है।

इन मंजूरियों के साथ, ईसीएमएस के तहत कुल 16 राज्यों में 34 उत्पादों से जुड़े 118 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। इससे 77,051 करोड़ रुपये के संभावित निवेश, 5,73,146 करोड़ रुपये का अनुमानित उत्पादन और 81,755 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

ये मंजूरियां घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेंगी, मूल्यवर्धन को बढ़ाएंगी, आयात पर निर्भरता कम करेंगी और उन्नत विनिर्माण क्षमताएं विकसित करेंगी, जिससे भारत एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा।( इनपुट पीआईबी)

 

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