डिप्लोमा के बाद रोजगार की तलाश से आटा चक्की उद्यमी बनने तक श्रीमती अकल्या का सफर

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026 ।( इनपुट पीआईबी) सुविधा और समय पर मिली मदद किस तरह सफलता की राह आसान कर सकती है, इसकी मिसाल तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले की श्रीमती अकल्या हैं। डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्हें रोजगार हासिल करने में कठिनाई हो रही थी। वह ऐसा छोटा कारोबार शुरू करना चाहती थीं, जिससे उन्हें आजीविका कमाने और परिवार की मदद करने का अवसर मिले। ऐसे में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम-एनएसएफडीसी की मदद उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगमएनएसएफडीसी की टर्म लोन योजना के अंतर्गत उन्हें एक लाख 80 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने अपने घर पर आटा चक्की शुरू की। यह ऋण तमिलनाडु ग्रामीण बैंक के माध्यम से 20 जनवरी 2025 को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया गया।
श्रीमती अकल्या के पास अपना काम शुरू करने का हुनर और दृढ़ संकल्प था, लेकिन कारोबार के लिए पूंजी की जरूरत थी। वित्तीय सहायता मिलने से वह घर से ही आटा चक्की स्थापित कर उसका संचालन करने में सफल रहीं।
अपना कारोबार शुरू करने से उन्हें अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ परिवार के करीब रहकर काम करने का अवसर मिला। इससे उन्होंने अपने श्रम के जरिए आय अर्जित करना शुरू किया।
आज अकल्या की आटा चक्की सफलतापूर्वक चल रही है। कारोबार से होने वाली आय से वह अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही हैं।
अकल्या के लिए आसान शर्तों पर मिली वित्तीय सहायता ने स्वरोजगार के सपने को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। उनकी कहानी बताती है कि समय पर मिलने वाली सहायता किसी इच्छुक उद्यमी को अपनी आजीविका का साधन खड़ा करने में महत्वपूर्ण मदद दे सकती है।



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