नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल

3 October, 2026, 12:42 pm

भारत सरकार ने कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि नवप्रीत सिंह के खिलाफ ड्रग्स की तस्करी और अन्य आपराधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गृहमंत्री  अमित शाह ने इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इस कार्रवाई में शामिल सभी एजेंसियों को बधाई दी।अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नवप्रीत सिंह ने ‘नवाब विर्क’ की कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर तुर्किए की नागरिकता हासिल की थी। इसके बावजूद वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की कथित तस्करी में सक्रिय रहा।गृह मंत्री के अनुसार , भारतीय एजेंसियों ने नवप्रीत सिंह का पता लगाया और उसकी वास्तविक पहचान का खुलासा किया। इसके बाद उसे तुर्किए से डिपोर्ट कराया गया और शनिवार को भारत वापस लाया गया। भारत पहुंचने के बाद उसे ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई।


अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर ड्रग कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नवप्रीत सिंह को भारत लाने की कार्रवाई में शामिल सभी एजेंसियों की सराहना की और इसे नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण सफलता बताया।इससे पहले अप्रैल में ड्रग तस्करी के संदिग्ध और मोस्ट वांटेड गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी मोहम्मद सलीम डोला को भी तुर्किए से भारत वापस लाया गया था। उस समय अमित शाह ने कहा था कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को डोला को तुर्किए से वापस लाने में बड़ी कामयाबी मिली है।

डोला की गिरफ्तारी को लेकर गृह मंत्री ने कहा था कि यह ड्रग्स से जुड़े भगोड़ों और संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्यों को कानून के दायरे में लाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। नवप्रीत सिंह के मामले में भी भारतीय एजेंसियों की अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए कार्रवाई सामने आई है।

मई में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के साथ मिलकर अजरबैजान से भगोड़े प्रभदीप सिंह को भारत प्रत्यर्पित कराया था। यह कार्रवाई 358 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े एक बड़े ड्रग्स मामले में की गई थी। पुलिस के मुताबिक, 2023 से फरार प्रभदीप को प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद स्पेशल सेल की तीन सदस्यीय टीम बाकू से भारत लेकर आई थी।

भारत और तुर्किए ने वर्ष 2001 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो जून 2002 में लागू हुई। यह समझौता दोनों देशों को आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भगोड़ों के प्रत्यर्पण की मांग करने की व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

 

 

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