हर साल 36–40 नए लड़ाकू विमान की जरूरत, तेजस-AMCA और MRFA पर नजर : वायुसेना प्रमुख मार्शल ए.पी. सिंह

3 October, 2026, 7:07 pm

 

नई दिल्ली। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों के बीच भारतीय वायुसेना अपनी हवाई ताकत को तेजी से आधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा है कि मजबूत सैन्य शक्ति किसी भी देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी है और आधुनिक संघर्षों ने एयर पावर की निर्णायक भूमिका को और स्पष्ट किया है।

वायुसेना प्रमुख के अनुसार  भारत को हर साल करीब 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। पुराने विमानों के चरणबद्ध तरीके से बाहर होने और नए विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण लड़ाकू विमानों की संख्या में अंतर बना हुआ है। मिग-21 जैसे पुराने प्लेटफॉर्म अब भारतीय वायुसेना का हिस्सा नहीं हैं।

तेजस, AMCA और MRFA से उम्मीद

वायुसेना की भविष्य की ताकत में तेजस एलसीए, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन परियोजनाओं में प्रगति के साथ आने वाले वर्षों में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी को कम करने की उम्मीद है।

वायुसेना प्रमुख ने आधुनिक युद्धों से मिले अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि आज रणनीतिक क्षमता केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। लंबी दूरी के सटीक हथियार, एकीकृत एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और मानव रहित हवाई प्रणालियां भी आधुनिक युद्धक क्षमता का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।

आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं

वैश्विक संघर्षों के कारण हथियारों, स्पेयर पार्ट्स और गोला-बारूद की सप्लाई चेन पर पड़े असर ने भारत के लिए स्वदेशी रक्षा उत्पादन की जरूरत और बढ़ा दी है। वायुसेना प्रमुख ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अब विकल्प के बजाय मजबूरी बताया।

वायुसेना स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में सहयोग कर रही है। इनमें आकाश, प्रलय, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल प्रणालियों के साथ आधुनिक रडार और एयरबोर्न सिस्टम भी शामिल हैं।

सीमा सुरक्षा से आगे मानवीय मिशन तक

भारतीय वायुसेना की भूमिका केवल युद्ध और सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वायुसेना ने विभिन्न देशों में मानवीय सहायता और राहत अभियानों में भी भाग लिया है। भारत में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव अभियानों में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

Broadcast Mantra का सवाल:
भारत के सामने चुनौती सिर्फ नए लड़ाकू विमान हासिल करने की नहीं, बल्कि समय पर उनकी डिलीवरी, पर्याप्त संख्या, हथियारों की उपलब्धता, स्पेयर सपोर्ट और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की है। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि भारत अपनी हवाई ताकत को कितनी तेजी से आधुनिक और आत्मनिर्भर बना पाता है।

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